Sujit Kumar Lucky

The Life Writer & Insane Poet

अहसासों को कभी पूछना …

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यूपी का चुनाव-प्रचार

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who talks a lot

तुम भी कभी बहुत बोलते थे….

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political neta ji poem hindi

नेता जी – #MicroPoetry

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Poetry

अहसासों को कभी पूछना …

By on February 7, 2017

तुम अपने ताल्लुक के, अबूझ हिस्सों में मुझे कभी देखना, उस ओर भी एक दिलचस्प इंसान है, बिलकुल तुम्हारी उम्मीदों की तरह का ! उम्मीदों के पहाड़ सा ढक दिया तुमने, जज्बातों को घुटन की आदत सी हो जाएगी, कभी खुले खुले में ला के देखना, ये जज्बात बड़े खूबसूरत से होते है ! अहसासों […]

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My Voice | Poetry | Thoughts

यूपी का चुनाव-प्रचार

By on February 1, 2017
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जनता की सेवा के लिए हो गया, पिता पुत्र में भी तकरार, ये है यूपी का चुनाव-प्रचार ! इधर के उधर गए, और उधर के नजाने किधर गए, मिल बैठे सब नदियों जैसे, धूल गए पुराने कर्म और विचार, ये है यूपी का चुनाव-प्रचार ! घी-तेल सब चुपड़े खायेंगे, अब कोई क्यों करे व्यापार, माटी […]

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Poetry

तुम भी कभी बहुत बोलते थे….

By on January 29, 2017
who talks a lot

बातों का सिलसिला अब वैसा नहीं चलता, लम्बी फेहरिस्त होती थी बातों की, मैं पहले तो मैं पहले की तकरार, अब रुक रुक कर कभी कभार मैं कुछ पूछता, और ठहरे ठहरे से तुम भी कभी बोलते, मुँह फेर के तुम भी रहते, बेमन से मैं भी कुछ कह देता, बाँकी के खाली हिस्सों में, […]

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Poetry

नेता जी – #MicroPoetry

By on January 24, 2017
political neta ji poem hindi

सड़कों के भी पाँव पखारे जाने लगे, लगता है नेता जी दौरे पर आने लगे ! लग गए विश्वकर्मा अब बनाने में पुल पुलिया नेताजी की गाड़ी जब चली जनता की गलियाँ ! उड़ने लगे अब सड़कों पर पर्चे, नेताजी के आने के है बड़े चर्चे ! फूलों का लगा अब बड़ा सा टीला, मंदिर […]

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Poetry

नव वर्ष के नए नभ में …

By on January 4, 2017
newyearnewme

बुझते अलाव सा नहीं… दहकते आग सा बन, दृढ प्रतिज्ञ बढ़ो ऐसे, जीवन के विस्तार को बुन, थकन पाँव में या लगे कांटे, रुकना न तू अपनी रफ्तार को चुन, जो टुटा भ्रम था वो रात था, सुबह हुआ अब ऐसे ख्वाब तू बुन, नव वर्ष के नए नभ में, अपनी नई उड़ान को चुन […]

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Poetry

नया चाँद …

By on December 19, 2016

बालों के गुच्छों में एक चाँद है, जो कंधे पर सर रखके, सुकून के तरीके तलाशता है, सुबह सुबह घूँघट डाले आधे चेहरे तक, बरामदे पर धीमे क़दमों से चलती है, किसी कोने में खड़े हो देखा है, उसे बड़े लहजे से चाय पीते हुए, दो चार घूंट के बाद जब नजर उठती, टकड़ा जाती […]

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Poetry

कुछ दिन जब …

By on November 9, 2016
Love Life & Things

कुछ दिन जब तुम नहीं बोलते, कुछ दिनों की चुप्पी होती, फिर बोलने लगती हर चीजें तुम्हारी तरह । सुबह सुबह खिड़की के पर्दो से झाँकती है धुप, तुम्हारी शक्ल लेकर, कमरे की वो दीवार, जिसपे बड़ा सा कैनवास लगाया था, बदल के हो जाती है, उसकी सारी तसवीरें तेरे चेहरे जैसी । कभी गुजरता […]

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Random Thoughts | Thoughts

किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? #AutumnDays

By on October 26, 2016

Autumn marks the transition from summer into Winter ….. किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? ढलती रात अभी की, जैसे हवायें खुले खुले बदन से टकराकर अटखेली करती प्रेमिका सी लिपटती ; दूधिया रोशनी में नहायी सड़के और आसमां की खूबसूरती जैसे गुलज़ार की नज्म, उस नज्म से जैसे चाँद आसमां से उतरकर […]

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Poetry

गाड़ी – (#MicroPoetry)

By on October 7, 2016

ऊँची लम्बी गाड़ी, खूब जोर का हॉर्न बजाती, बगल में आके झटके से ब्रेक लगाती, दिल धक् से रह जाता उस वृद्ध का, अंदर गाड़ी से ठहाके की आवाज आती है ….

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