Category Archives: Random Thoughts

किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? #AutumnDays

Autumn marks the transition from summer into Winter ….. किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ?

Autumn Days Thoughts
ढलती रात अभी की, जैसे हवायें खुले खुले बदन से टकराकर अटखेली करती प्रेमिका सी लिपटती ; दूधिया रोशनी में नहायी सड़के और आसमां की खूबसूरती जैसे गुलज़ार की नज्म, उस नज्म से जैसे चाँद आसमां से उतरकर आपके बगल में आ बैठा ! जेठ की दोपहर के बाद जैसे रात का अहसास आज ही हुआ हो, उमस और तपिश के बाद पहली ओस की फुहार, किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

छत की मुंडेरों से घंटों देखना सड़क की ओर आते जाते अजनबी चेहरों में कुछ खोजने का कौतुहल, जैसे उसके चेहरे पर कुछ लिखा हो और असफल सी कोशिश उसे पढ़ने का ! आधी सी ठंड पर लिपटती आधी सी लिपटती चादर, जैसे चाहत हो कोई अधूरी सी ! कुछ रात ढलने पर पर उपजी सन्नाटों पर दूर कहीं निकल जाने का मन जैसे मन कुछ तलाशना चाहता हो !
किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

#Autumn #SK

New Year

2016 – नये वर्ष का सफरनामा ….

ये जिंदगी का सफर है जो उम्मीदों से भरा ; सफर में पड़ाव है, सफर में मिलने वाले साथी है, कुछ छूटने वाले साथी है, उनकी यादें है लेकिन सफरनामा कब रुकता है ! गुजरे हुए मुकाम नहीं आते लौट के लेकिन हमेशा यादों की एक सौगात है जो साथ रहता ! ऐसे ही साल दर साल जिंदगी का सफरनामा अपने नए उम्मीदों के साथ बढ़ता हुआ ! कुछ निर्णय है, कुछ नसीहतें, कुछ सीख है तो कुछ अनुभव ! रिश्तें प्यार हँसी ख़ुशी गम चिंता सब का मिश्रित रंग बिना उढ़ेले जिंदगी की सही तस्वीर कभी बनती किया !

शब्दों का सिलसिला यूँ ही अनवरत चलता रहेगा, अपने आप को नए ऊर्जा से भरे, चुनौतियों को स्वीकारें और आगे बढ़ते रहे ! नव वर्ष की शुभकामनाएँ !!

“” बीता जो वक़्त वो यादों का मौसम था,
जाने इस बरस की क्या क्या सौगात है ! “”

New Year

#SK ~ Happy New Year 2016 🎆 🎋

विथ न्यू होप 🙂

happy birthday inbox love

हैप्पी बर्थडे – इनबॉक्स लव ~ 14

happy birthday inbox loveतुमने ही शुरू किया था ये सब !
तुम्हारा वो जीटॉक स्टेटस ..
“हैप्पी बर्थडे टू माय स्पेशल फ्रेंड 🙂 :D”
दो तीन स्माइली के साथ खूबसूरत सा वो मैसेज !

उस दिन तुमने स्पेशल बना दिया था , पुरे दिन तुमने अपने चैट स्टेटस में यही तो लिख रखा था !
मेरे लिये तो यही था बर्थडे गिफ्ट ;
अब मेरी बारी थी ; पर मैं स्पेशल कैसे लिखता इनविजिबल चैट में स्टेटस कहाँ होता ! पर मैंने कुछ भेजा था तुम्हें ~ 12.01 सुबह सुबह “बार बार ये दिन आये …. हैप्पी बर्थडे टू यू ” और सरप्राइज गिफ्ट भी तो ! उसके बाद फिर ये त्यौहार था हर वर्ष कुछ नया कुछ अलग, कुछ मैसेज, कुछ इनबॉक्स में तस्वीरें … कभी नहीं भूलता ये तारीख !

पर तुम भूल गये थे ; एक बार तो झगड़ भी लिया था,
आज तुम्हारे स्पेशल फ्रेंड का बर्थडे है तुम कुछ कहोगे नहीं … अगले दिन तक इनबॉक्स में ख़ामोशी पसरी रही ! फिर एकपल “हैप्पी बर्थडे टू माय स्पेशल फ्रेंड” !
ख़ुशी भी नहीं हुई , स्माइली भी तो लगाना भूल गए थे तुम !
फिर न मैंने याद दिलाया और तुमने भी कोशिश नहीं की !

पर तुम्हारे इनबॉक्स में बार बार ये दिन आये ;
और ” हैप्पी बर्थडे 🙂 ” ये हमेशा की तरह तुम्हें हँसाने के लिये हर साल मैं भेजता रहा ।।

मन ही मन सोचने लगा …
काश हम स्पेशल न होते ….. सिंपल में क्या हर्ज़ था !!

#SK in Inbox Love …  💌 🌾

inbox love in December

Love in December – इनबॉक्स लव ~13

inbox love in Decemberदिसम्बर, धुंध, सिमटी रातें …
दिसम्बर की कुछ यादें !
जल्दी जल्दी शाम का ढल जाना ; हाँ हर बदलता मौसम यादों को भी तो बदल देता ; ये शीत में धुलती रातें, सुने से सड़कों पर धुंधली पड़ती रौशनी ! किसी साल से इसी मौसम की कुछ बातें याद है ? जैसे खुद से ही सवाल कर रहा वो और खुद ही जवाब भी सोच रहा ! किसी यादों में खो जाता वो, कुछ संवाद सा उसके अन्दर चल रहा जैसे …
— इनबॉक्स में —
अच्छा है बहुत ;
क्या अच्छा है ?
स्वेटर लाल रंग का जो फेसबुक पर पिक अपलोड की है !
अच्छा क्या ख़ास है ?
बस जैसे ये स्वेटर तुम्हारे लिए ही बना है ; लाल रंग के स्वेटर में लिपटी सादगी !
हम्म …
आगे कुछ जवाब नहीं मिला !
कुछ रुककर फिर वो कहता पोंड्स का एड कितना अच्छा है न रिश्तों की गर्माहट ; इस मौसम में याद दिलाती !
क्या याद दिलाती ?
जैसे बच्चे से मासूम चेहरे को हाथों से छूना !
हम्म … और कुछ तारीफ में शब्द है ?
शब्द तो प्रेरणा है जो इस सादगी से मिलती ; ये कभी खत्म नहीं होगी !
हर हमेशा कवि और कविता, कैसे सोच लेते इतना !
बस सोच लेता ; कैसे ये सोचा नहीं कभी . .
ओके ओके – आज के लिए इतना ही ;

बीच में रोका उसने – सुनो एक बात थी !

ठण्ड बढ़ रही दिसम्बर में ; वो लाल स्वेटर और लाल स्कार्फ बांध के जाना ! सॉरी लाल टोपी 😛

सो फनी 🙂 स्माइली के साथ !!

जैसे किसी ख्वाब से उठा हो वो ; रात बीतने को आ रही थी ; खाली चैट विंडो ; वही दिसम्बर की रात फिर … नींद की आगोश ! लम्बी सांस लेके बोलता “नाउ इट फील्स लाइक दिसम्बर; अनफोरगेटेबल दिसम्बर” !!

#SK in Inbox Love … With Essence of Winter 🍂🍂

away goodbye inbox love

बहुत दूर चला …. इनबॉक्स लव -12

away goodbye inbox loveअब बहुत ही दूर चला गया । हाँ इस इंटरनेट के अनंत संसार से परे ; पता नहीं कितनी दूर हाँ जहाँ से कोई संवाद नहीं होगा , कोई खबर नहीं होगी तुम्हारी । होंगे जिंदगी के अपने अपने उत्सव ;अपनी अपनी मायूसी में खोये रहेंगें, क्यों कहेंगे तुमसे ? होंगी उलझने भी बस अब तुझसे नहीं कहूँगा !

कितनी दूर चले गए ; ये फेसबुक और जीटॉक ही तो हमें मिलाता था । कब मिलते थे ; लेकिन मिलने से कहीं ज्यादा मिले थे ; इस दुनिया से भी परे चले जाओगे ? एक दिन तो ऐसा ही होगा ; हाँ अजनबी बन के बेखबर से रह जायेंगें कौन कब कहाँ चला जायेगा !

हाँ ये अब नहीं मिला सकता हमें ; इंटरनेट की तरंगे शिथिल हो गयी जब पास आके हम नहीं मिले ! आस पास के शहर में होने का सुकून था । दोनों एक तरफ के चाँद को देखते थे एक ही जगह बिल्डिंग के पीछे ; एक ही तरह का सुबह बालकनी के सामने निकलता सूरज ।मेरे संवाद तब तो सुबह और शाम के समय की पाबंद थी,  तुम्हारे इनबॉक्स में रोज  आ धमकने की आदत । हाँ तो अब ? …. अब अलग अलग शहर ! अजनबी बनाता है ये शहर भी, वो शहर कुछ पास होने का सुकून देता था लगता था जैसे किसी गली में कोई चेहरा तुमसा दिख जायेगा । कभी हम मिल पायेंगे ।

पर दूर आके अब उम्मीद है कभी नहीं मिलेंगे । खो जायेंगे अपनी गली में ; किसी चेहरे में तेरे होने की उम्मीद भी नहीं होगी ।

सच में भूल भी जाओगे ? क्या कभी याद करोगे ?

कुछ सवालों को अनुत्तरित रह जाना चाहिये …

इंटरनेट नहीं रेडिओ की तरंगे है मेरे आस पास अब ; संगीत है “तेरी दुनिया से होके मजबूर चला ; मैं बहुत दूर चला । “

#SK in Inbox Love …

If a writer falls in love with you, you can never die..

यू कैन नेवर डाय – Inbox Love 11

If a writer falls in love with you, you can never die..जब सब शांत स्तब्ध और अकेला सा हो जाता तो यादों का बादल तैरने लगता मन के खुले आसमानों में ; यादें भी तो कभी दम तोड़ देती होगी किसी के मन में कितना याद रख पायेगा कोई जिंदगी के अनेकों उधेड़बुनों में ! पर तुम नहीं मरोगे कभी … उसने बड़े सहज ढंग से कह दिया !

 
क्यों ? क्यों नहीं सब एक दिन खत्म हो जाता, बातें .. यादें .. जहन से चेहरा भी मिट जाता है !
नहीं कुछ चीजें नहीं मिट सकती ; तुम नहीं मिट सकते मेरे मन से ; उसने विरोध में कहा !

याद है एक दिन तुमने क्या कहा था … ” इफ ए राइटर फाल्स इन लव विथ यू, यू कैन नेवर डाय ”

हम्म .. इससे से आगे कुछ लिखा नहीं तुमने !

बस तुमने कुछ लिखा नहीं और मैंने कभी लिखना बंद किया नहीं ; मैं नहीं मरने दूँगा किसी स्मृतियों को, किसी बातों को, हाँ शक्ल उम्र दर उम्र ढलेगी लेकिन वो जो शब्दों में तुम्हें दर्ज करके रखते जा रहा हूँ , वो हमेशा नया है बदलते मौसमों की तरह ; सावन की बरसात की तरह, उफनती नदी की तरह, पेड़ के नए पत्ते की तरह, डूबते चाँद और रोज उगते सूरज की तरह !

मेरे शब्दों में रोज तुम सुबह गमले को सींचते, पक्षियों को दाना देते हो, आँगन में पायल की रुनझुन तो गलियों में कदमों की आहट से हो गए हो !

तुम्हें मैंने शब्दों के हर साँचे में ढाल दिया है, एक कैनवास जिसपर बनी तस्वीर से मौन बातें की जा सकती है !

बताओ क्या ये शब्द मरने देंगे तुम्हें ; तुम्हें नये नये रूप में, नये नये ढंग से ये शब्द रोज नयी जिंदगी देंगे ! तुम कभी नहीं मरोगे ; एक अमर कविता में परिणत हो चुके हो तुम !

तुमने बस कह के भुला दिया लेकिन मैं समझ गया था “If a writer falls in love with you, you can never die.. ” !!

#SK in Inbox Love …

dream die

रोजमर्रा ….

NDTV के एक रिपोर्ट से प्रेरित ~

रोज एक जैसी रोजमर्रा की जिंदगी, वही वक़्त से पहुँचने की रोज फ़िक्र तो वापस समय पर आने की कोशिश ! एक पाश में जकड़ा समय का पहिया, बस एक नियत कार्यों और गतिविधयों की लम्बी सुरंग जो जिंदगी के अंतिम मुहाने तक जाती ; उस ओर जब निकलते कुछ इन्तेजार करता “कुछ सवाल, कुछ लोग, कुछ व्यतीत जीवन, कुछ स्मृतियाँ, कुछ सफलतायें, कुछ विफलताएँ ! ये सलाह आसान भी नहीं और वास्तविक भी नहीं क्योंकि हम सब उसी पाश का हिस्सा है, इसी खींचा तान में बढ़ते जा रहे ! हाँ इन्हीं जटिलताओं के बीच जो कुछ करने का जोखिम उठाते वो इतिहास बनाते … विचारों के बवंडर में घिरना और खुद को स्थिर रख पाना जीवन जीने की एक कला ही है ! और हम जिंदगी के कलाकार, ऐसे सपनों और ख्वाहिशों का क्या ; “हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले” जिंदगी के सफरनामे को इन कुछ पंक्तियों के माध्यम से जीवन को देखिये तो अपने अंदर सोच और नजरिये में बदलाव को महसूस कर सकते !

पाश की एक कविता है :-
** — ——
बैठे बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
सहमी सी चुप्पी में जकड़े जाना बुरा तो है
पर सबसे ख़तरनाक नहीं होती

सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
ना होना तड़प का
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक वो आँखें होती है
जो सब कुछ देखती हुई भी जमी बर्फ होती है..
जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्बत से चूमना भूल जाती है
जो चीज़ों से उठती अन्धेपन कि भाप पर ढुलक जाती है
जो रोज़मर्रा के क्रम को पीती हुई
एक लक्ष्यहीन दुहराव के उलटफेर में खो जाती है
सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है
जिसमे आत्मा का सूरज डूब जाए
और उसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके ज़िस्म के पूरब में चुभ जाए !
** — ———–

Thoughts :

Insane Poet - Sujit Kumar

 

 

 

inbox love facebook likes

लाइक – इनबॉक्स लव (Inbox Love ~10 )

inbox love facebook likesलाइक की दुनिया कितनी बड़ी हो गयी है न ; रोज फोटो पर लाइक, उदासी पर लाइक, रोने पर भी लाइक, लाइक लाइक जैसे सब हाल चाल पूछ रहे फोटो पर लाइक देके, बिना कुछ कहे ! कभी ज्यादा लाइक के बीच में वो एक लाइक खोजता अलग वाला लाइक ; ये अलग वाला लाइक हाँ तुम्हारा लाइक ; कभी कभी तुम्हारे लाइक नहीं आने तक बाँकी सारे आये लाइक मुझे नापसंद से लगते !

मेरे ऑनलाइन रहने तक तुम भी ऑनलाइन थे, पर मैं सोच रहा था की वो तस्वीर अभी तक तुमने देखी या नहीं, वो ट्व लाइनर्स मेरे मन में उपजी बात, ग़ालिब से इंस्पायर्ड तो नहीं बस ऐसे मन में आया तो लिख दिया तुमने पढ़ा की नहीं, पढ़ा तो वो बात जो उसमें थी, जैसा मैंने सोच के लिखा वैसा तुमने सोच के पढ़ा की नहीं ! इन सब की गवाही तो कौन देगा ~ तुम्हारा वो एक लाइक ! जो हर पोस्ट को अलग कर देता, उसके अर्थों को और निखार देता, लिखने की सार्थकता का प्रमाण बन जाता !  वो भी जब मायूस हो जाता की अनुसना हो गया मेरा लिखा तब मेरे जाने के बाद, अकेले सन्नाटे में तुम निहारते होगे शायद, उसके शब्दों के तारों को कहीं से जोड़ते होगे और फिर अपनी पसंद की स्वीकृति देते होगे ! और फिर रात के लम्बे इन्तेजार के बाद का सुबह कुछ खास होता, उन कई लाइक के बीच तुम्हारी पसंद को कई बार देखता, पुष्टि करता की हाँ ये पसंद तुम्हारी ही है !

कभी कभार लम्बा सुख पड़ जाता जैसी लम्बे अरसे से बारिश की आस में खेत, उम्मीद से बोझिल आँखें लिए .. लम्बे अरसे तक न उन शब्दों को तुम निहारते न किसी तस्वीरों को अपनी नजर देते और ऐसे एक दिन लम्बी बारिश, बाढ़ की तरह लौटते हो पिछले कई महीनों से पड़े सारे तस्वीरों सारे शब्दों में फूँक देते हो एक जान, जीवंत काव्य हो उठते है सब ! और उस दिन कितने ही लाइकस एक साथ जैसी और कोई चाहता ही नहीं इतना !

 लाइक नाराजगी भी है, मन में पसंद करके वापस लौट आना, कुछ न कहना न पसंद करना ! हाँ उपेक्षा समझ लो, अपने पसंद को बचा के मैं उपेक्षा करता हूँ तुम्हारी, पर ये घृणा नहीं है, न ही निराशा है, न ही तिरिस्कार है तुम्हारा, बस कुछ लफ्जों और वक़्तों से उपजी उदासी की प्रविृति है ये उपेक्षा ! तुम पूछ नहीं सकते बस समझ सकते हो मेरे लाइक नहीं करने का कारण, मैं वो आभासी दुरी को मजबूत कर रहा, बहुत ही मजबूत अभेद्य दीवार की तरह जहाँ से संवाद और स्मृतियों का कोई प्रवाह न हो सके किसी ओर !

 

लाइक नहीं करना भी बिना दर्ज किया हुआ एक लाइक ही है ! मेरे लाइक करने के और भी मायने थे और है ! मैं एक दिन लौटुँगा पुराने सारे बिना लाइक के चीजों को लाइक करने इन्तेजार हो सके तो करना ….

Inbox Love Bring By – Sujit

Insane Poet - Sujit Kumar

 

 

Life in a small city

कुछ तो लोग कहेंगे …

कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना बाबू मोशाय सादे कुर्ते पैजामे में गलियों से जाते हुए ; और लोग उन्हें देखकर बातें बनाते हुए ! कहीं न कहीं अभी भी हमारा समाज ऐसे ही दकियानूसी मानसिकता से घिरा है ; लोग हमेशा अपने आस पास के लोगों में ज्यादा दिलचस्पी रखते, समाज की जिम्मेदारी रचनात्मक होनी चाहिए, बड़े बुजुर्ग आपको किसी विषय पर सलाह देते वो सार्थक है ; लेकिन आपके भविष्य और आपकी जिंदगी का विस्तृत विवरण जब वहीँ समाज करने लगता तो फिर कुछ कटाक्ष कुछ वक्तव्य आपको विचलित करने लग जाते !

Life in a small city
बात महानगर की करे तो केवल आधुनिकता मॉल कल्चर और पहनावों तक ही सीमित नहीं रहा ; वहाँ पर सोच को भी आजादी मिली कुछ नया करने की, अपने राह पर चलने की ; और समाज ने भी इसे स्वीकारा ! ये कह सकते महानगर का जीवन एकाकी है किसी का किसी से कोई मतलब नहीं पर दूसरे पहलू पर समाज ने अपने सोच को विस्तृत आयाम दिया है आपके आने जाने, पहनावे, नौकरी, व्वयसाय, शादी जैसी बातों पर समाज में टिका टिप्पणी की प्रवृति नदारद सी हो रही !

उलट अभी भी छोटे शहरों और गाँवों में चौक चौराहों से लेकर फुर्सत सम्मलेन कुछ ऐसे विवरणों से भरा हुआ मिलता ” गुप्ता जी के बेटे की शादी नहीं हुई, शर्मा जी का बेटा पढाई छोड़ गिटार बजा रहा आजकल, अपने पडोसी के बेटे के बारे में जाना नौकरी छोड़कर किताब लिखने का शौक चढ़ा है कहता समाज को बदलेगा” बताये घर में बैठ के लैपटॉप चलता कहता प्रोजेक्ट कर रहा ऐसे भी भला कोई काम होता ! शायद अब भी हम दूर के ढोल सुहाने जैसी मानसिकता से घिरे है महानगर में कोई नौकरी करता ये एक पैमाना हो गया समाज के लिए, इससे आगे उस व्यक्ति के क्या गुण अवगुण, क्या विचार व्वयहार है उस तक नहीं जाते ! क्या प्रतिभा है किसी में  वो सिंगर है, जर्नलिस्ट, राइटर, एक्टर, मॉडल, स्पोर्ट्समैन क्यों जाने बस दिल्ली, बम्बई, बैंगलोर में नौकरी उर्फ़ जॉब करता वाह वाह इतने में ही सामाजिक पैमाने का आरक्षण प्राप्त हो जाता और सब लग जाते एक फ़िराक में ” अब शादी करवा ही दिजीए, इतने बड़े शहर में जॉब कर ही रहा” !!

कुछ महीने पहले महानगर को अलविदा कह अपने शहर की और रुख करना आसान कदम नहीं था ; कई बरसों की यादों का एक सौगात सा था साथ, कितने लोगों से मिलना, कितने लोगों का जाना, कितने लोगों का मन में ठहर जाना ! अपने आप को शहर शहर के भावनात्मक जुड़ाव से निकालना आसान नहीं होता ; कितनी अनगिनत पल है कितनी तस्वीरें है जेहन में  पर जीवन की अपनी अपनी प्राथिमकताएँ है, हर आयाम में ढलने के लिए हमे तैयार रहना चाहिए ! और कब तक पलायन की व्यथा कथा गाते रहेंगे, अपने शहर से उस शहर तक की दुरी को हमें ही तो पाटना होगा ! कुछ प्रयास तो करने होंगे कुछ बदलाव के लिए बस हमेशा आसान राहों से चलते रहना भी तो रास नहीं आता, ओझल मंजिल और बोझिल क़दमों के होते हुए सफर को संवारना जिंदगी को जिंदादिल हो जीने सा है !

बस रूबरू है आजकल “कुछ तो लोग कहेंगे” की परिपाटी से पर 3Idiots का रेंचो तो लेह लद्दाख में अलग थलग रह खुश था, बस ख़ुशी के मायने की एक तलाश पर निकल चला है राही ; अलविदा कहने का वक़्त नहीं था दोस्तों !!

बाबू मोशाय फिर गाने लगे ” कुछ रीत जगत की ऐसी है, हर एक सुबह की शाम हुई ! फिर क्यों संसार की बातों से भींग गए तेरे नैना … छोड़ो बेकार की बातों में ..कुछ तो लोग कहेंगे !!

#SK – An Insane Poet