Category Archives: Work & Life

Make in India Painting in Manjusha Art by Sujit

Manjusha Art – My New Initiative as a Folk Artist

जीवन में एक अवसर मिला अपने राज्य और क्षेत्र के सांस्कृतिक धरोहर को समझने का और उसके लिए कार्य करने का ; एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूँ अपने आस पास के कुछ महिलाओं को इस कला से जोड़ने की ; इस कला से जुडी कुछ बातें !

मंजूषा कला के बारें में ~

मंजूषा कला अंग प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है ! मंजूषा चित्र कला अंग क्षेत्र के लोकपर्व बिहुला-विषहरी पर आधारित है, ये एक पारम्परिक लोककला है जो पौराणिक समय से चली आ रही ! सिंधु घाटी सभ्यता के समय इस लोककला के विकसित होने के प्रमाण है ! मंजूषा कला को विश्व की प्रथम कथा आधारित चित्र कला माना जाता है ; मंजूषा कला में तीन रंगों का प्रयोग होता है ये है हरा गुलाबी और पीला ! इसे अंगिका चित्रकला भी कहते है जो आधुनिक समय में भागलपुर क्षेत्र के रूप में विख्यात है ! मंजूषा कला में बॉर्डर धार्मिक चिन्हों और x रूपी आकृति में पात्रों को दर्शाया जाता है ! साँप भी प्रमुखता से इस कला में उपयोग होता है !

मंजूषा कला से जुडी लोकगाथा –

कहते है की भगवान शिव एक बार चंपानगर के तालाब में स्नान करने आतें है और उसी समय उनके पाँच बाल टूटकर कमल पर गिरते जो पाँच कन्याओं का रूप ले लेती और ये कन्याएँ शिव जी की मानस पुत्री कहलायी ! इन पाँच कन्याओं को मनसा कहते है ; इन्होंने शिव जी से विनती की इन्हें संसार पूजे तो भगवान शिव ने कहा अगर चंपानगर का सौदागर चंदू जो मेरा भक्त है अगर वो तुम्हें पूजे तो संसार भी पूजने लगेगा ! मनसा चंदू सौदागर पर दवाब बनाती की वो उसे पूजे ; लेकिन ऐसा होता नहीं ! मनसा देवी को सर्प और मायावी शक्तियाँ थी ! मनसा देवी कुपित हो चंदू सौदागर को दंड देती उसके सारे पुत्रों को डश लेती और सभी पुत्रों की मृत्यु हो जाती ! फिर चंदू सौदागर को शिव जी वरदान से एक पुत्र मिलता जिसका नाम बाला था ; उसका विवाह बिहुला से होता ! शादी के पहले रात ही ; मनसा बाला को नाग से डसवा देती और उसकी भी मृत्यु हो जाती ! बिहुला को अपने पतिव्रता धर्म पर पूरा भरोषा होता और वो एक नाव में मंजूषा (एक साज सज्जा से भरी आकृति ) में अपने पति को ले नदी मार्ग से चल देती ; काफी बाधाओं से लड़ वो भगवान से अपने पति का जीवन वापस पाती ; और अंत में अपने ससुर चंदू सौदागर को भी मना लेती की वो मनसा की पूजा करें !

मंजूषा कला इसी गाथा का चित्र रूपांतरण है !

मंजूषा कला को संजोने के अनेकों कार्य हो रहे ; सरकार का प्रयास उदासीन ही अभी तक रहा है ; कलाकारों बिना उचित पारिश्रमिक के इस कला से नहीं जुड़े रह सकते, कला के व्यवसायिक उपयोग के संभावनाओं की तलाश करनी होगी ! इस कला के इंटरनेट प्रचार प्रसार में कुछ प्रयास कर रहा हूँ ! वेबसाइट और मोबाइल एप्प के माद्यम से इस कला को लोगों तक पहुँचाने का प्रारम्भिक प्रयास है मेरा ~

वेबसाइट – www.manjushakala.in
मंजूषा कथा चित्र  – 
http://manjushakala.in/manjusha-katha/
एंड्राइड एप्प – Manjusha Art on Google Play
फेसबुक – Manjusha Art on Facebook
यूट्यूब – View Videos of Manjusha Art on YouTube

कुछ मेरे द्वारा बनाई गयी मंजूषा चित्र – #Sujit 

Make in India Painting in Manjusha Art by Sujit

Make in India Painting in Manjusha Art by Sujit

Painting of God Sun in Manjusha Art by Sujit

Painting of God Sun in Manjusha Art

Champa Flower Painting in Manjusha Art

Champa Flower Painting in Manjusha Art

Shiv Ling Painting in Manjusha Art by Sujit

Shiv Ling Painting in Manjusha Art

Painting in Manjusha Art

Painting of Manjusha Art

Manjusha / Angika Art Painting

Manjusha / Angika Art Painting

– Sujit

A Thank You Note !!

कार्यस्थल भी एक परिवार है ! हम अपने जिंदगी में कितना वक़्त कार्यस्थल पर व्यतीत करते ; मेट्रो शहर में एक ही तो धुन होती सुबह उठ के कार्यस्थल की ओर ; पूरा दिन ; दोपहर ढलती शाम और घिरती रात तक अपना जीवन व्यतीत करते ; कार्यस्थल जीवन का अभिन्न अंग बन जाता इसे कैसे नकारा जा सकता ! कार्यस्थल के साथी जीवन से जुड़ते ; जीवन की हर बात साझा करते ; हँसते मनाते जीवन यहाँ बीतता कुछ मेट्रोनमा के साथ बनते कुछ अंतरंग मित्र !

आज जीवन के एक पड़ाव पर कार्यस्थल से विदाई का भावुक क्षण था ; यहाँ आप अपने केवल प्रतिभा और काम के लिए ही नहीं जाने जाते ; अन्य साथी के साथ आपका बर्ताव और सहयोग की भावना भी आपको सबसे जोड़ती ! दूसरों को प्रोत्साहित करना ; उनको अपने जीवन की दिशा चुनने में मदद करना भी एक जिम्मेदारी है ! सभी मित्रों के विदाई संदेश ने मन में ख़ुशी दी की ; शायद मैं उनके जीवन में कुछ अमिट हिस्से छोड़ने में कामयाब रहा !

कार्यस्थल जीवन के निरंतर प्रवाह का सूचक है ; रोज नई जिम्मेदारियाँ के निर्वाह के लिए खुद को तैयार करना ; अपने ज्ञान को निरंतर विकसित करने के लिए प्रयत्न करना और चुनौतियों के समक्ष खुद के सामर्थ्य को साबित करना ! यहाँ प्रयत्न भी है ; कभी निराशा भी है ; कभी आशा भी है ; कभी संवाद भी है ; कभी विवाद भी है ; कभी प्रतिस्पर्धा है तो कभी समझौता भी है ! ये इस जगह की खूबसूरती है ; जिंदगी के महत्वपूर्ण हिस्से का रंगमंच जहाँ हम बेहतर इंसान बनते ; सीखते, समझते !

जीवन के इस पथ पर नये आयाम जुड़ते ; आज इसी नये आयाम के क्रम में अपने वर्तमान कार्यस्थल से किसी नये दिशा में अग्रसर होने के पूर्व मन में मिश्रित भाव थे ; कई यादें थी ; कुछ किस्से थे कुछ बातें थी ; कुछ साथी थे जो पीछे छूट रहे थे ! आने वाले कल के प्रश्न थे मन में संशय था लेकिन आपलोगों के संदेशों ने मन में ऊर्जा दी है की जीवन में बेहतर और कुछ नया करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ और रहूँगा ! भले कार्यस्थल एक ना हो लेकिन मन में संबंध बने रहेंगे !

आप सभी के स्नेह के लिए धन्यवाद ! Grapes Digital में काम करना एक अनूठा अनुभव रहा ; मन में कई स्मृतियाँ यहाँ की जीवन पर्यन्त बनी रहेगी ! सभी साथी को उनके सुनहरे भविष्य की शुभकामनायें !

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जो बिखरने का हुनर तुम्हें मालूम है दोस्त ;
एक दिन तू जरूर बनाएगा बुलंदी की इमारतें कई !!
#SK

#सुजीत

 

meet with yourself

कभी रूबरू हो खुद से – A walk on night, a great meet with yourself !

कितनी आपाधापी है ना ; रेत की तरह फिसलती उम्र ; जद्दोजहत में सजते संवरते बिखरते सपने ; कभी रुकते से कदम तो कभी भागता मन ! ये सब हमारे जीवन का हिस्सा है ! इन सब आपाधापी में खुद से रूबरू होना हम भूल जाते ; कभी टटोलिये अपने मन को कितनी गांठें पड़ी है वहाँ ; कितनी ही गिरहें सिलवटें उभरी है वहाँ !

कभी सब बातों को छोड़ ; ऑफिस से लौटते महानगर की किसी चौराहें पर रुकिए ; देखिये कतार में फिसलती वाहनों को ; बहुत कुछ जिंदगी का नजरियां दिखेगा ! आये एक शाम से रूबरू होते ! किसी ने ट्वीटर पर लिखा था “कनॉट प्लेस दिल्ली में समंदर की कमी पूरा करता” जब भी राजीव चौक में मेट्रो सीढ़ी पर होता था लगता था एक बोझिल भीड़ जलप्रपात की तरह ऊपर से गिर रहा हो ; आपका मन ना चाहते हुए भी उस भीड़ को ओढ़ लेता ; जैसे कितना कुछ पीछे गुजर गया हो पीछे ! एक शाम इस भीड़ को छोड़ते हुए उस समंदर को देखने निकले ; गोल वृताकार एक जैसे भवन ; अनेकों सजी दुकानों के बीच क़दमों को बढ़ाते हुए ; शांत मन से चहलकदमी करता हुआ ! हवायें उजले उजले बड़े खम्बों के बीच से ऐसा शोर कर रहा था जैसे सचमुच समंदर की किनारों पर लहरों का शोर हो ! बस ये मन की अभिवयक्ति ही हो पर हमारा मन हर तरह की कल्पनायें गढ़ सकता और उसे महसूस भी कर सकता ! इस तरह जिंदगी से रूबरू हुई एक शाम !

meet with yourself

मन ने कुछ गिरहें खोली, कुछ बंधनों को तोड़ा एक सोच सी उभरी -” जिंदगी ऐसी ही भागती रहती हम जीना क्यों भूल जाते ; निराशा है भले ; नाकामी भी है ! पर नाकामी से ऊपर है अपना प्रयास, हमने कब कुछ ऐसा सोचा कब ऐसा किया की जो मन तक गया हो ; हमेशा ” अपनी बातें, अपनी ख़ुशी, अपनी समस्या” जो हमें ख़ुशी के पलों से दूर करता ! दूसरों की जिंदगी संवारने का हिस्सा भी बनिए ; किसी को हंसाइए ; किसी को जीवन की राह दिखलाइये ; किसी का मार्गदर्शन करिये, किसी की मदद करिये ; देखिये आपको अपनी कशमकश भी कम होती नजर आएगी !

पूर्णता की कोई सीमा होती क्या ? या पूर्णता का कोई समय ! शायद “परफेक्शन” शब्द से इसे जोड़े तो ज्यादा तर्कसंगत हो ! आमिर खान जिन्होंने अपने कार्यों से पुरे सिनेमा जगत को प्रभावित किया ! अपने परफेक्शन के लिए जाने जाते, बस काम की ततपरता ही नहीं विविधता भी एक प्रेरणाश्रोत है सबके लिए !  वो भी एक आम कलाकार की तरह कई साधारण से फिल्में ; पर जीवन को अपने मन और विचारों से बदला ; केवल अपने ही नहीं देश समाज से भी जुड़ के मन को टटोला हमारे लिए भी तो जीवन ऐसे ही है ! एक अलग विचार हम भी रख सकतें उदाहरण अनेक है बस उस परिवर्तन के लिए खुद से रूबरू होना होगा !

हर दिन को नए नजरिये से देखें ; कुछ विविधता भरे जिंदगी में ; बस अपने जीवन से नहीं सबके जीवन से जुड़ने का कुछ ऐसा प्रयास करे ! आपको बोझिल लगता दिन, माह, वर्ष हमेशा नई सौगात की तरह लगेगा !

आप भी अपने आप से रूबरू हो के देखिये ; बहुत कुछ छिपा है आपके मन में ; हम इस जीवन को भरपूर जी के ही सफल बना सकते ! भौतिक सुख सुविधायें क्षणिक सुख दे सकता पर मन का संतोष का रास्ता इस जीवन को जीने में ही है !

एक हिंदी संगीत जिंदगी से ओतप्रोत –

” रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही… ”
(इम्तिहान -)

छोड़े जा रहे इस गीत के साथ ..स्वंय सोचिये .. – #सुजीत

विन्डो से मैक तक का सफर वंडरलैंड से !!

पूरी तरह याद है करीब डेढ़ दशक पहले का वो दिन जब स्कूल में कंप्यूटर की पहली कलास; ऊपर जाके ठीक लाइब्रेरी के बगल में शांत एकांत सा कमरा जिसपर लम्बा मजबूत ताला लटका “संगणक कक्ष” .. कृपया जूते उतारकर अंदर प्रवेश करे। अंदर जैसे विज्ञानं के अनूठे अविष्कार की प्रयोगशाला, एक कौतुहल और जिज्ञासा चरम पर ! पूरी तरह सुसज्जित महँगे कवर से ढँका कंप्यूटर .. पुराने जमाने में कंप्यूटर का रख रखाव सहज नहीं था .. वतानुकलित, धूल मिट्टी से बचाव काफी हिफाजत और शिक्षक की हिदायत के बीच रखा जाता था इसे !

काफी कौतुहल से भरा होता था कंप्यूटर कलास ; याद है डॉस की काली स्क्रीन पर कमांडों की छेड़ छाड़ ; फिर अगले वर्ष “बेसिक” पर १० ..२० .. ३० .. ४० .. के क्रम में प्रोग्राम का लिखना .. फिर “लोगो” का टर्टल जो हमारे इशारों पर चित्र बनाता था ! कुछ वर्षों की मेहनत के बाद देखने को मिला था विंडो स्क्रीन जिसमे माउस .. सिंगल क्लिक .. डबल क्लिक से सब संचालित था ! पेंट ब्रश .. पॉवरपॉइंट पर वो तस्वीरों और अपने नामों के साथ स्लाइड का घूमना .. और इस तरह विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम का सफर फिर छूटा नहीं .. स्कूल से ऑफिस तक अनवरत चलता ही रहा !

विंडो कंप्यूटर डेस्कटॉप से लैपटॉप एक अनूठा ही सफर है टेक संसार में ; याद है वो पेंटियम थ्री का वो पुराना कंप्यूटर कब डब्बा ; बार बार उसके पार्ट पुर्जे हिल जाते थे ! उसका ढक्क्न खोल के ही रखा था ; जब चाहा हाथ लगा दिया, हर इतवार छुट्टी का तो उस डब्बे की फॉर्मेटिकरण में बीत जाता था ! फिर इसी तरह राजधानी वंडरलैंड में रोजगार की शुरुवात विंडो कंप्यूटर से नाता गहरा होता गया ! पापा ने किसी छुट्टी में घर जाने पर कहा लैपटॉप ले लो ; जब अब पढ़ाई लिखाई सब इसी पर तो आगे बढ़ने के लिए यही जरुरी चीज हुई ! समझो किताबों की जगह इसने ले ली ! फिर अपना लैपटॉप अपने हाथ था ! आदत रही अपना मतलब अपना कोई साझेदारी नहीं ! अपना ब्राउज़र , सेटिंग, वॉलपेपर सब मेरे पसंद की चीजे अपने नियत जगह पर ! किसी के हाथों में कीबोर्ड के बटन को निर्ममता से पीटना जैसे चोट मुझे लग रही हो !

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फिर ये लैपटॉप तो जिंदगी का हिस्सा बन गया ; MCA के सारे सेमेस्टरों का असाइनमेंट, प्रोजेक्ट कितना साथ दिया इसने ! वो सुबह तक C , C ++ के प्रोग्रामों से अंतिम त्रुटी के हल न होने तक लड़ते रहना ; शायद जुझारू बना दिया था इसने मुझे; एक छोटे शहर से आया वाकिफ नहीं था दुनिया के कई रंगों से ; इंटरनेट और निरंतर सीखने की इच्छा ने एक अलग ही इन्सान को अपने अंदर बनते देखा ; एक अलग पहचान टेक सेवी होने की ! स्कूल के संगणक कक्ष में वो बैठा बच्चा विज्ञान की इस दुनिया में अपनी उड़ान भर रहा था !

स्कूल में घंटो कविता की किताबों में खोया रहने वाला मैं, लम्बे लम्बे भारी शब्दों को अपने निबंध में लिखने के लिए मिले कई प्रमाण पत्र; पता नहीं कहाँ खो गए थे रोजमर्रा की आपाधापी ने ; पर शब्दों का प्यार मरता नहीं ; आखिर लैपटॉप ने शब्दों से मेरा प्यार वापस कर दिया ; टूटे फूटे लरखराते शब्दों से शुरू अपना सफर शब्दों का जिंदगी के साथ चलता रहा; कितने जिंदगी के रंगों को समेट कर लाता और उकेड़ देता अपनी कविताओं में ; कुछ लोगों ने कवि कहके सम्बोधित किया ; पर बस जिंदगी का फलसफां लिखता रहा.. पल पल को जीता रहा और कुछ कुछ लिखता रहा ; विंडो के इस कृत्रिम आविष्कार ने मुझे इंसान बना दिया ; जो जिंदगी को एक नये आयाम से देखता, आधुनिक दुनिया से रूबरू होता समझता सीखता और आगे बढ़ता !

अपने लैपटॉप से एक नाता सा रहा ; जैसे वो संगी साथी हो कितने वर्षों का जो मुझे समझता आ रहा, गमगीन होता उसपर अपने गमों को व्यक्त किया, ये मेरे वंडरलैंड का ऐसा साथी जिसने हर हमेशा आगे बढ़ने की हिम्मत दी ; कुछ नया करने की नसीहत दी ! वो होली दिवाली की पुरानी तस्वीरें, घर की याद, दोस्तों का प्यार सब कैद रखा है इसमें !

विंडो कंप्यूटर के कई वर्षों के सफर के बाद . . मैकबुक किसी दूसरी दुनिया की यंत्र की तरह प्रतीत हुआ; एक ऊँगली की क्लिक, दो ऊँगली का जेस्चर, तीन ऊँगली से ड्रैग सेलेक्ट ; कुछ अलग सा सजा डेस्कटॉप अरे मेरा “माय कंप्यूटर” भी नहीं रहा ; एक प्रथम कक्षा के बच्चे की तरह सीखना शुरू किया ; जल्दी ही निपुणता को प्राप्त कर लूँगा ; भविष्य में कल कई चीजे इस विज्ञानं के मायानगरी में देखने को मिलेगी ! तब तक सीखते रहिये, आगे बढ़ते रहिये; मैं भी सीख रहा ! जय विज्ञानं !!

~ सुजीत ( डिजिटल दुनिया से )

वंडरलैंड से – Every Morning Wake-up For Your Work Not Just For ur Job !

वंडरलैंड ये अंग्रेजी शब्द जो मुझे इस शहर में चलायमान रखता; अध्भुत है चकाचौंध इस शहर की,
गाँव के सपने लेके यहाँ प्रवेश कठिन था .. सपने देखने से ज्यादा, सपने पुरे करनी की कीमत कहीं ज्यादा है !
बड़ी गाडियाँ भागती बसें .. अजीब भाषा भूषा वेश परिवेश ! फिर सामंजस्य बिठाते रहे और जिंदगी को जीते गये !
अपनी पहचान बनाने की कर्मभूमि जहाँ सुबह से शाम और फिर अगले सुबह के बीच का फासला बहुत कम होता !

कभी आपको लगता है की बस जल्दी आज ऑफिस पहुँच जाये, उस काम से जुड़े जो कल अधूरा था, एक कथन कहीं पढ़ा था;
“अगर आपको अपने काम से प्यार हो जाये तो फिर आपको कभी काम नहीं करना पड़ेगा” और ये कथन पूर्णतः सत्य प्रतीत होता,
जब आप अपने काम को उस तरह पसंद करने लगते जैसे अन्य चीजों को ! क्या काम करना जीवन यापन का जरिया मात्र है,
जीविकोपार्जन का साधन मात्र तो कभी किसी चित्रकार की कलाकृति को देखिये क्या उसमें आपको तल्लीनता नजर नहीं आती,
इक संगीतकार अपने धुनों को आते जाते गुनगुनाता रहता, सोते जागते और जो आप सुनते उसी सतत प्रयत्न का प्रदर्शन मात्र ही तो है !

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हम अपने जीवन का इक महत्वपूर्ण हिस्सा अपने कार्यस्थल पर व्यतीत करते, और यही वक्त हमारे भविष्य को तय करता, हमारी पहचान बनाता ! इंसान अपने कार्यों से जाना जाता, पार्थ गांडीव ले कुरुक्षेत्र में लड़ा तभी उसकी वीर गाथा का हम गुनगान करते ! हम भी अपने राष्ट्र का हिस्सा है, हमारा किया गया हर कार्य हमारे राष्ट्र को मजबूत बनाता !  हर इंसान के अंदर अपनी इक क्षमता है उसे विस्तृत करें, वक्त के पीछे नहीं उसके आगे चलने का हौसला रखें, बाधायें और उलझन से मार्गदर्शन प्राप्त कर सतत चलते रहें !

कोई कार्य छोटा बड़ा नहीं .. पद और धन का आवंटन व्यवस्था मात्र है, आप अपने कार्य को ही सर्वोपरी माने;
भविष्य आपके लिये नयी जिम्मेदारियों को ले बैठा है, क्या हम अगर अपने वर्तमान कर्म से विमुख हो जाये तो,
क्या भविष्य के कर्तव्यों के निर्वाह कर पायेगें ?

अपने सपनों के लिये जीये, प्रयत्न करें .. आगे बढ़े; जीवन की यही खूबसूरती है !
सुबह फिर आयेगी .. इक नये विचार से उठे .. बस किसी पुरानी सी जिंदगी को जीने के लिये नहीं उसे बदलने के लिये !

Wonderland is waiting for you.. So next morning awake for your work instead of job !!

#Sujit

Three Dimensional View of Life – Come Out From Enigma!!

What about life? As we are living now or as like we wish for? And some time which takes you in past. These are three possessions of Life. Personally I thought Life itself defined as 3D.

Life kept in three dimensional portraits – Past, Present & Future. These are the entities of our living; all three come together and makes our life. Wherever Past full of regrets, memories and old hidden gems, Present in which we act, fight, face the truth, revolt the circumstances and bring the change. So what about future – it is mix dissatisfaction of past & Present.  Future is flawless, it is insane, it is imaginary, and it is a fiction.

Future is a dream for us but seeds of dream reside in Present.  Sketch your future but must define your role to make it colorful. We all stuck in present with circumstances, failures & fear. Dissatisfaction which arise in present, takes it as opportunity.   Dissatisfaction itself defined your effort, you tried for something and it not comes out as you want. Hold your dissatisfaction utterly and make it as a fuel for future journey. Don’t burn yourself without any intention; turn your displeasure into ignition for a journey of imaginings.

3d-life

Never regret on your past, it was a previous version, just think about revise copy of yourself. Regret if you not work for bettered version. Comparison between past and present is a race between me & me, so run honestly judge honestly. No one understands your past and no one decide your journey, you have to sail your boat by yourself.

In this three dimensional model thoughts rise and fall, people comes and go, situation favors & resist but hope, enthusiasm for life makes you go.

Break your barriers, come out from circular enigma, prepare to switch from one medium to another, take challenges, love others. Respect others!!

So think act and enjoy the three dimensional refraction of life  ……

 

Sorry for my bad English pick the things behind words – SK 

छोरे जा रहे इक गीत के साथ ..स्वंय सोचिये ..

यहाँ पूरा खेल अभी जीवन का तुने कहाँ है खेला,
तेरा मेला पीछे छुटा .. राही चल अकेला !!

Are We Working for Bettered version of ourselves?

Do what you think, do what you wish for, this time never come back to you. If you really care for your thoughts forget your fear of failure, every defeat comes with full of lessons.  Don’t judge me with my current words only; I am still an ordinary people who have lust for writing and sharing.

Living in High indulges Metro city looks fascinating in televisions and magazines but it really not. You need to chase everything here. Our Major obstacle of life is fear of something. Sometime Fear of Failure, sometime fear of losing someone, sometime fear to face the public crowd, fears of taking responsibilities, fear of losing our comfort zone… We all are surrounded with some fear. These fears degrade our innovation, we try to keep us in a subtle zone and this continuous nature of negotiation creates obstacles to go beyond them.

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Image Source: http://elitedaily.com

If you are reading this post…Don’t expect from me for a fairy tale of highly successful person who done miracles in life. It just a possession of life I am sharing with you. I never thought about known be an acclaimed as a person of some profound skill sets. Still I am wondering what life is and how to live it on fullest, this journey of life full of jerks, which diminishes my way. But I never give up!!

So let’s begin with some incidents…

#Story I: I don’t know how my words effects your living, I found you in enigma, your clash between dreams and exceptions. I felt your fear inside me,   it never be easy to make strong decisions about life, to resist all circumstances. But continuous effort of daily dying actually makes you alive everyday with new hopes of rays. Hope it will continue to spread and create an instance for everyone who gets interacted with your life.

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Image Source: www.businessfinancestore.com

#Story II: Mentorship itself a huge accountability, knowingly or unknowingly may be some of you get lessons from me, some time you admitted it some time you refused it, I accept all of you evenly. Sometime you blame me for my grey shades; I have no any explanations for it. But I want to transmit some of my renderings of life. I know one day you forget my attire, overlook my appearance. But I want be remembered with my words in your mind, which perpetually resides with you.

Before end this narration, cultivate a parallel universe inside you which defend you from all insecurities and helps you to discover yourself.

Yes I am insane nerd and still reinventing myself for a bettered version of myself.  :- Sujit 

छोरे जाते है खुद को तलाशने के लिये कुछ शब्दों के साथ ……..

लिबास बदल लेते है,
पुरानी जिंदगी ले फिर,
रोज फिर चल देते !

उम्र तमाम बिताया,
किस्मतों से शिकायतों में !

थोरे जल जाते तो,
पत्तों का ढेर खत्म होता !

चीखते रह गये भीड़ से निकलने को,
कभी चुप हो लेते तो जिंदगी से दो बात होती !!

मायूसी को हँसी बनाएँ – Let’s Live Our Life Each Day With A Smile

खुशी की क्या परिभाषा .. और हर हमेशा घिरे महसूस करते जिससे यही है गम ?
याद है .. कब पढ़ी थी पिछले दफा किताब की दस पंक्तियाँ सुकून के साये में !
कितने उलझते जा रहे है इस आपा धापी में .. कितना ? ये भी तो सोचने का वक्त नहीं !

मायूसी को कुछ ज्यादा ही जगह दे दी है हम सबने .. दफ्तर जाने की भागदौड़ में इस कदर हम घिर गये है,
नये सुबह की हँसी, खुशी.. हर रोज की नयी हवायें कुछ महसूस ही नहीं कर पाते,
बस किसी कोने में रोज होते दिन में शाम को जोड़ने की कवायद में लग जाते..
आशंका है अगले पदोन्नति में कुछ कम ना मिले, कहीं दूसरे को ज्यादा ना मिल जाये,
कभी कोसते इन सड़कों की भीड़ को, कभी राशन की महंगाई को, कभी नेताओं के भाषण को,
जिंदगी को इतनी गणनाओं के साथ जीने लगते जैसे अपनी ही जिंदगी की किश्तें अदा करनी हो किसी को,
ना हम अपनी छुपी भावनाओं को समझते ना अंदर उठने वाले सवालों से रूबरू होते,
स्कूल की भागदौर को देखे .. छोटे बच्चे भी सोते जागते नाइंटीज़ प्लस की चिंता में खोये रहते ;
कौन देख पाता क्या कुछ हसरतें दबती चली जाती उनकी, क्या इच्छाएँ है उनकी करने की बनने की !
फिर निकलते उम्र में थोड़े आगे और खो जाते एक छद्म दुनिया में जिंदगी में रंगीनियाँ खोजते
आजादी खोजते, और उस छद्म आभाषित दुनिया में सब खुशियों के मायने छुटते चले जाते !

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मायूसी को हँसी बनाएँ

अपने मन की बनाई नजाने कितनी अनेकों उलझनों से बस शिकन को सजा लेते हम ..
जिंदगी वाकई खूबसूरत है हर सुबह.. हर शाम.. हर रात.. क्योँ खोये इसे हम
कभी देखा जाये जिंदगी को इस शिकन और शिकायतों से निकल कर भी !
शिकायतों से परे .. शिकस्त की डर से दूर; कभी अपने आप से बात कीजये और खुद खुशियाँ आपके अंदर छिपी है,
इस बस हमने कहीं दबा दिया है छुपा दिया है !
“मायूसी को हँसी बनाएँ”.. ना गम हमेशा रहता ना खुशी बस ये चाँद की तरह है अमावस और पूर्णिमा के बीच बढ़ता घटता!

बस इसी आपाधापी में एक शाम से कुछ शब्द

उस शाम लोहे के पुल से गुजरते,
मैंने चाँद देखा..
बादलों से घिरा घिरा आधा अधूरा सा..
फिर अगले दिन ..
पूरा आसमां आज नया नया सा था..
चमकता चाँद आज मुस्कुराते हुए नजर आया !

#SK Random Thoughts …. In Pursuit of Happiness

जिंदगी अपनी है सवाल भी अपने – Outside Your Comfort Zone

कुछ संदेह मन में .. कुछ स्थायित्व की कमी यूँ तो लगता जैसे एक दोष हो जिंदगी के लिये !
पर एक गहराई से देखे तो हमारी जिंदगी को यही संदेह और स्थायित्व की कमी रफ़्तार देते ;
देते एक उम्मीद चलने की, एक हौसला आगे बढ़ने की !

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विस्तृत रूप में देखे और सोचे तो स्थायित्व एक बंधन सा है.. अक्सर हम इसे देखते अपने जिंदगी में,
रोजमर्रा की बात हो या शिक्षा रोजगार में संलग्न निहित हमारे प्रयास ! स्थायित्व हमें रचनात्मक होने से रोकता,
एक ही पुनरावृत्ति कार्यों की, आदतों की या अन्य घटनाक्रमों की हमें साधारण कर जाती !
और फिर कभी जब हमें अहसास होता की वक्त बीत गया और हम साधारण ही होते चले गये;
कुछ अफ़सोस कुछ ग्लानि होता ! ज्ञान, रोजगार, व्यपार में स्थायित्व को खोजे हम लेकिन प्रगतिशील,
रचनात्मक तत्वों को भी अपने अंदर लगातार विकसित करते रहे क्योंकि बदलते वक्त के प्रवाह से आपका विकास
अवरुद्ध ना हो ! यही बात संदेह से भी संबंधित है .. कहीं ना कहीं अपने अंदर एक कोना संदेह का हमें अपने कार्यों को
गंभीरता से करने के लिये प्रेरित करता; और ये संदेह अंदर उठने वाले अभिमान को भी नियंत्रित करता;
सफलता उत्साहित करती .. लेकिन मन में छुपा संदेह सफलता को जारी रखने की उर्जा का वाहक होता !
यह बातें हर व्यक्ति के नजरिये से भी निहित है हम इसके किस पक्ष को किस तरह उजागर करते !

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ऐसे अंग्रेजी में यदा कदा वर्कप्लेस में ये बातें सुनने को मिल ही जाती .. शायद सही भी है इस प्रतिस्पर्धी समय के लिये
“Come out From Comfort Zone, Insecurities Keeps Us Moving, Don’t Relax, Casual Approach, Sincerity etc. “……

अपने आप को टटोलते रहना जरुरी है इस जिंदगी से कदम मिला के चलने के लिये !
कुछ ऐसी बातों के साथ फिर आयेंगे .. जिंदगी अपनी है सवाल भी अपने खुद चिंतन कर सकते आप ..

..एक किशोर कुमार के गाने साथ छोरे जा रहे ..
♫ जब दर्द नहीं था सीने में ;
क्या खाक मजा था जीने में.. ♫

At the end of this random thought sharing an infographics about comfort zone.

This Infographic was produced by WhatismyComfortZone.com

Random Thoughts & Views : – सुजीत कुमार