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यायावर ..

हम जब किसी दूसरे शहर में जाते और वहाँ रहने लगते, वहाँ की गलियाँ, वहाँ की रातें, मिलते जुलते लोग, अजनबी रास्तों के साथी और बीता वक़्त एक यादों का समंदर बना देता हमारे अंदर और जब उसको छोड़ जातें वो यादों का शहर हमारे अंदर ही रह जाता इसी भाव से एक कविता ! […]

हम जन-गण-मन को गायेंगे ….

गैस पानी की लाइन में, हम कागज़ लेकर जायेंगे ! मुफ्त की सब्सिडी पाने को, हम कागज़ को दिखायेंगे ! दुष्प्रचार को करने को, मुँह ढक-ढक कर आयेंगे ! मेट्रो-बस जलाने को, अपना अधिकार बतायेँगे ! हर बात पर हर दिन, संविधान को खतरे में बतायेंगे ! थोथी-थोथी बातें कर बुद्धिजीवी कहलायेंगे, देशहित की बातों […]

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं ….

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं चुपचाप यूँ ही कहीं .. खामोशियों से लड़ते हुए, थककर बहुत ऊब कर बैठा हूँ … नदी के किनारे कुछ दुर से, बलुवा जमीन पर हवा थिरक कर दिन भर के उमस से गीले हुए बदनों पर टकराकर एक ऐसी ठंडक दे जाती , जैसे गर्म तपते दिन को […]

ये कैसी लड़ाई है…

ये कैसी लड़ाई है, ऊँचें आवाज में चीख के, लाल चेहरों से गर्म हाँफती साँसें, थक के दूर जा बैठना, चुप हो के घण्टों बिताना रूठ कर प्लेट को वापस कर देना पानी गटकना और नींद की आगोश में जाना रोज ढलते जाना चेहरों का आधे काले आधे सफेद सारे बाल ; जैसे जल गए हो वो उखड़े […]

आओ फिर बच्चे बन जाये …..

ले फिर गुलाटीयाँ, और फिर करतब करें । बंदर का खेल, और भालू बन डराये । सीखे फिर ककहरा, और बोले तोतली जबान । बाल को खींचें, और मुँह चिढ़ाये । दूर से चंदा मामा को, अपने संग बुलाये । जीवन की आपाधापी से अलग, आओ फिर बच्चे बन जाये । #SK #DadsDiary 🤡🤠