dads diary
Life Events My Living Poetry

लुका-छुपी ….

बचपन का एक कौतुहल जो हर बच्चा अपने माँ के आँचल में सीखता, चेहरा छुपाना, फिर शरारत भरी नजरों से देखना की सब उसको देख रहे या नहीं, कभी कभी जब चेहरे से आँचल को नहीं हटा पाता उलझ जाता तो अपने गुस्से को जाहिर करना कि कोई उसकी मदद करें, बच्चों के इस लुका […]

wrecked life
Poetry

उजाड़…

उजाड़ दिन , जैसे कुछ किताबें इधर उधर हो बिस्तर पर , कपड़े मुड़े सिमटे फेंकें हुए , क्या कहाँ किस ओर क्या पता , घण्टों खोजो तो न मिलता कोई सामान , ये थे उजाड़ घर के कुछ अस्त व्यस्त कमरे । अनबन, आधे अधूरे मन से बातें, बेरुखी, तकरार और जिरह ही जिरह, […]

rain childhood
Poetry

बचपन और बादल

जब भी बादल छाता है मेरा बचपन लौट जाता है ; वो कागज की नाव, वो छोटी सी छतरी , भीगे से जुते, बारिश में खेल, वो गिरना फिसलना , गंदे से कपड़े , बिगड़ी सी सूरत, माँ की फटकार, फिर थोड़ा सा प्यार, बस उम्र बढ़ी थोड़ी , ये बचपन और बादल ; कुछ […]

Night & Pen Poetry

In Search of Orion …

कभी कभी छत की ऊपरी मंजिल पर जाता हूँ, नितांत रात में निहारने आकाश को, इस भागदौड़ में भूल जाता हूँ प्रकृति के इस अजूबे को बचपन से जो नहीं बदला अब तक मैं ढूंढ लेता हूँ डमरू जैसे ओरियन को । जब मास्टर जी ने बताया था तुम्हारे बारे में, बचपन में उस दिन […]

New Year New Me 2018
Life Events My Living Poetry

नया वर्ष है नया सवेरा ..

नया साल जैसे आपको ये महसूस होता की चलो एक पुराना लम्हा था खत्म हुआ ; अब एक नई उम्मीद है पुराने साल की कुछ अनचाही चीजें लगती इस साल ठीक हो जाएगी ! एक पूरा नया सजा सजाया बिना परेशानियों का सब कुछ बदल देने वाला एक नया वर्ष जैसे सामने हो और मन […]

winter poem
Poetry

धुंध में अजनबी

धुंध के दोनों पार बैठे हम वहम भी है होने का और नहीं भी तुम भी बोलते कभी कभी कभी कभी कुछ मैं भी कहता हूँ धुंध में खोये दो अजनबी से ओस की चादर के उस ओर से इस पार खींच पाता तो एक गर्माहट सी होती रिश्तों की ! ये धुंध भी न […]