Poetry

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं ….

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं चुपचाप यूँ ही कहीं .. खामोशियों से लड़ते हुए, थककर बहुत ऊब कर बैठा हूँ … नदी के किनारे कुछ दुर से, बलुवा जमीन पर हवा थिरक कर दिन भर के उमस से गीले हुए बदनों पर टकराकर एक ऐसी ठंडक दे जाती , जैसे गर्म तपते दिन को […]

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ये कैसी लड़ाई है…

ये कैसी लड़ाई है, ऊँचें आवाज में चीख के, लाल चेहरों से गर्म हाँफती साँसें, थक के दूर जा बैठना, चुप हो के घण्टों बिताना रूठ कर प्लेट को वापस कर देना पानी गटकना और नींद की आगोश में जाना रोज ढलते जाना चेहरों का आधे काले आधे सफेद सारे बाल ; जैसे जल गए हो वो उखड़े […]

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आओ फिर बच्चे बन जाये …..

ले फिर गुलाटीयाँ, और फिर करतब करें । बंदर का खेल, और भालू बन डराये । सीखे फिर ककहरा, और बोले तोतली जबान । बाल को खींचें, और मुँह चिढ़ाये । दूर से चंदा मामा को, अपने संग बुलाये । जीवन की आपाधापी से अलग, आओ फिर बच्चे बन जाये । #SK #DadsDiary 🤡🤠

no mad
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खानाबदोश….

अलग अलग मंजिलों पर रहता मैं, कभी जिंदगी की तन्हाई तलाशने, ऊपर छत पर एक कमरा है, पुराना रेडियो पुरानी कुर्सी, और धूल लगी हुई कई तस्वीरें, जिंदगी से ऊब कर बैठता जा मैं उस मंजिल पर, कभी तलघर वाली मंजिल पर चला जाता, मकड़ी के जालों में सर घुसा ढूँढता हूँ बचपन की चीजें, […]

empty man poetry
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खोखला आदमी ..

करता जिंदगी की बातें वो, बड़ी बड़ी वसूलों की फेहरिस्त लोग सुन के सोचने लगते थे बदल जाती थी कई की जिंदगी कुछ खाली खाली लोग उससे मिल भर जाते थे उम्मीदों की बातों से ; सब कहते जाने क्या क्या भरा है, उसके इस मन में ; उसे भी लगता वो भरा हुआ है […]