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#Bihar Needs Reverse Migration – नादान परिंदे घर आजा !

दीवाली और छठ त्यौहार बिहार की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करते । नेताओं से लेके न्यूज चैनल तक ने खूब ब्रांडिंग भी की गाने बजाए, फेसबुक व्हाट्सएप्प ऑडियो वीडियो सब जगह इस पर्व में बिहार ही बिहार दिखता । पर हर त्यौहार का वर्ष एक टीस लेके आता अपनों से हर वर्ष नहीं मिलने का […]

no mad
Poetry

खानाबदोश….

अलग अलग मंजिलों पर रहता मैं, कभी जिंदगी की तन्हाई तलाशने, ऊपर छत पर एक कमरा है, पुराना रेडियो पुरानी कुर्सी, और धूल लगी हुई कई तस्वीरें, जिंदगी से ऊब कर बैठता जा मैं उस मंजिल पर, कभी तलघर वाली मंजिल पर चला जाता, मकड़ी के जालों में सर घुसा ढूँढता हूँ बचपन की चीजें, […]

empty man poetry
Poetry

खोखला आदमी ..

करता जिंदगी की बातें वो, बड़ी बड़ी वसूलों की फेहरिस्त लोग सुन के सोचने लगते थे बदल जाती थी कई की जिंदगी कुछ खाली खाली लोग उससे मिल भर जाते थे उम्मीदों की बातों से ; सब कहते जाने क्या क्या भरा है, उसके इस मन में ; उसे भी लगता वो भरा हुआ है […]

dads diary
Life Events My Living Poetry

लुका-छुपी ….

बचपन का एक कौतुहल जो हर बच्चा अपने माँ के आँचल में सीखता, चेहरा छुपाना, फिर शरारत भरी नजरों से देखना की सब उसको देख रहे या नहीं, कभी कभी जब चेहरे से आँचल को नहीं हटा पाता उलझ जाता तो अपने गुस्से को जाहिर करना कि कोई उसकी मदद करें, बच्चों के इस लुका […]

wrecked life
Poetry

उजाड़…

उजाड़ दिन , जैसे कुछ किताबें इधर उधर हो बिस्तर पर , कपड़े मुड़े सिमटे फेंकें हुए , क्या कहाँ किस ओर क्या पता , घण्टों खोजो तो न मिलता कोई सामान , ये थे उजाड़ घर के कुछ अस्त व्यस्त कमरे । अनबन, आधे अधूरे मन से बातें, बेरुखी, तकरार और जिरह ही जिरह, […]