Category Archives: Thoughts

Up election poem sattire

यूपी का चुनाव-प्रचार

जनता की सेवा के लिए हो गया,
पिता पुत्र में भी तकरार,
ये है यूपी का चुनाव-प्रचार !

इधर के उधर गए,
और उधर के नजाने किधर गए,
मिल बैठे सब नदियों जैसे,
धूल गए पुराने कर्म और विचार,
ये है यूपी का चुनाव-प्रचार !

घी-तेल सब चुपड़े खायेंगे,
अब कोई क्यों करे व्यापार,
माटी छोड़ अब मंदिर महल बनेंगे,
अब राम जी का ही करेंगे ये बेड़ा पार,
ये है यूपी का चुनाव-प्रचार !

न कोई ऊँचा न कोई नीचा,
जपते रहे विधि के सरताज,
वोटर है अब भाई भाई,
घर में पड़ी वोट की मार,
ये है यूपी का चुनाव-प्रचार !

#SK

किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? #AutumnDays

Autumn marks the transition from summer into Winter ….. किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ?

Autumn Days Thoughts
ढलती रात अभी की, जैसे हवायें खुले खुले बदन से टकराकर अटखेली करती प्रेमिका सी लिपटती ; दूधिया रोशनी में नहायी सड़के और आसमां की खूबसूरती जैसे गुलज़ार की नज्म, उस नज्म से जैसे चाँद आसमां से उतरकर आपके बगल में आ बैठा ! जेठ की दोपहर के बाद जैसे रात का अहसास आज ही हुआ हो, उमस और तपिश के बाद पहली ओस की फुहार, किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

छत की मुंडेरों से घंटों देखना सड़क की ओर आते जाते अजनबी चेहरों में कुछ खोजने का कौतुहल, जैसे उसके चेहरे पर कुछ लिखा हो और असफल सी कोशिश उसे पढ़ने का ! आधी सी ठंड पर लिपटती आधी सी लिपटती चादर, जैसे चाहत हो कोई अधूरी सी ! कुछ रात ढलने पर पर उपजी सन्नाटों पर दूर कहीं निकल जाने का मन जैसे मन कुछ तलाशना चाहता हो !
किसे न इश्क़ हो इस मौसम से !

#Autumn #SK

social media troll

बातें गाली गलौज की …..

सोशल मीडिया और गाली गलौज ….

बहुत अच्छा प्रश्न है ; व्यापक है ; समस्या है ! लेकिन रोज एक ही बात बोलना की गाली गलौज हो रहा , ये कौन लोग है , वो कौन लोग है ! बीजेपी कांग्रेस व्हाट्सप्प फेसबुक तू तू मैं मैं ! आखिर कब तक यही जुमला फेंकते रहेंगे ये कौन लोग है ये कौन लोग है – आखिर लोग तो निश्चित तौर पर मंगल ग्रह के नहीं होंगे जो किसी न्यूज़ पर गाली – गलौज करने आते होंगे ! गाली भी लेवल लेवल के है – पढ़े लिखे पत्रकार जब देश के प्रधानमंत्री को नसीहत देते की खुनी पंजा वाला आदमी आज अमरीका घूम रहा इत्यादि इत्यादि खैर ये तो बुद्धिजीवी वर्ग वाला गाली है इसका तो कोर्स होता है ये सर्टिफाइड टाइप की गाली इसको आपने आईफोन से ट्वीट किया होगा वजन होगा इसके उलट में कोई कार्बन और लावा से फ्लैट भाषा में गाली गलौज कर जाता है तो समस्या है होनी चाहिए ! इस विषय को आगे नहीं बढ़ाते , मूल बिंदु पर चलते। ….

संदर्भ पर आते है गाली गलौज का कोई समर्थन नहीं कर रहा ; हम समस्या के जड़ में नहीं जाते सोशल मीडिया का प्रादुर्भाव विगत ५ सालों में बढ़ा है ; मोबाइल और इंटरनेट भी क्रांति की तरह आया तो समस्या यहीं से शुरू होती विज्ञानं सृजनात्मक है तो विध्वंशक भी है, हथियार बना सेना इस्तेमाल करती अब समाज में कोई उसी हथियार से उपद्रव करता डराता धमकाता तो हमने क्या किया, हथियार पर निबंध लिखा , नहीं ! हमने कानून बनाये, लोगों को जागरूक किया, स्कूल से कॉलेज में उस संविधान के बारे में बताया की सामाजिक उपद्रव अपराध है !

आइए चलते है इंटरनेट विहीन समाज की ओर ये कहीं भी हो सकता पटना बनारस दिल्ली कहीं भी ; क्या आपको गली के मुहाने पर बैठे लड़कियों पर सीटी बजाते लड़के नहीं दिखे, क्या कॉलेज के गेट पर बाइक चमकाते लड़के नहीं दिखे, आप पर फब्ती कसते लोग नहीं मिले, स्कूल में आपके प्रश्न पूछने पर अभद्र भाषा में बोलने वाले लड़के पिछली बेंच पर तो जरूर ही मिलें होंगे जो कहते होंगे “साला बड़ा आया पढ़ने वाला” सड़क पर ओवरटेक करने पर पीछे से आवाज तो जरूर आई होगी “बाप का सड़क समझता है **** “. ; ये समाज का एक तत्व है , एक हिस्सा है जिसके दिमाग में ये अभद्रता पलता है ! और इन्ही सब किसी बात के बढ़ने पर हम उस लड़के के पिताजी के पास, या स्कूल के हेडमास्टर के पास, या रोड पर बाता-बाती पर पुलिस के पास जाते या गए होंगे ! इसका मतलब एक उपाय है कानून है व्वयस्था है इस अभद्रता के खिलाफ ! शिक्षा बढ़ी जागरूकता बढ़ी और कमोबेश ही सही समाज में सुधार हुआ !

अब उसी समाज उसी तत्व उन्ही लोगों को एक 3जी सिम, एक मोबाइल या लैपटॉप, वाय-फाय राऊटर से जोड़ देते, एक नया आयाम खुल गया पहले तो सामने मोहल्ले के लोग थे टिप्पणी करने के लिए अब तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक संसद से लेके विधान सभा तक न्यूज़ से लेके सिनेमा तक खेल से लेके खिलाड़ी तक, ये समस्या क्या बीजेपी कांग्रेस तक है ? ट्रोल तो हर चीज में पनपता जा रहा !

समस्या वहीँ है हमने इस समाज को इंटरनेट का झुनझुना तो पकड़ा दिया पर बजाए कैसे, कब , कितना , क्यों , कहाँ ये नहीं बताया न सिखाया ! क्या स्कूल से कॉलेज तक कोई पाठ्यक्रम शामिल हुआ नागरिक शास्त्र की किताबों का संसोधन हुआ जहाँ सड़क के नियम के साथ मोबाइल चलाने और गाली देने न देने की कुछ नियम हो ! समस्या लोग नहीं व्वयस्था है ; और इसी व्वयस्था की खामी का कोई राजनैतिक उपयोग-दुरूपयोग अपने अपने गणित के हिसाब से इस इक्वल टू बटा जीरो कर रहे !

अगर बुद्धिजीवी मानते गाली गलौज पर रोज दू चार हजार वर्ड का आर्टिकल लिख सकते तो इसके निदान पर क्यों नहीं , क्यों नहीं सब मिले के एक मसौदा बनाए सोशल मीडिया के उपयोग , इसके प्रबंधन, इसके नियम कानून परिभाषित हो, इसके दुरूपयोग की सीमा , सोशल मीडिया को जागरूकता का विषय बनाना, सोशल मीडिया नीति आयोग भी बना डालिए, सोशल मीडिया को पाठ्यक्रम में शामिल करना, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग क्यों न हो जो उपद्रवी कंटेंट को रोके, सोशल मीडिया और राजनैतिक उपयोग पर विधान क्यों न बने, सोशल मीडिया पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में मीडिया या कोई अन्य संस्था कैसे उपयोग करें इस पर क्यों नहीं कोई पहल हो !

इस पर भी मीडिया मार्च निकाल कर सरकार और संसद तक जा सकती ; एक मोमबत्ती इंडिया गेट पर इसी गाली गलौज के नाम ही सही या मुन्ना भाई के तरह बापू के राह पर गाली गलौज वालों को गेट वेल सून भी कहा जा सकता ! वो बीमार है उनके अच्छे होने की कामना तो कर ही सकते !

लेखक सोशल मीडिया एक्सपर्ट है (निजी राय ) – सुजीत कुमार

आईये एक मुहीम अपनाते
” सोशल मीडिया पर जो लोग गाली गलौज करते वो बीमार है ! उन्हें गेट वेल सून कहिये ! “

#ThankYouSachin

देखते होंगे क्रिकेट पहले भी लोग, लेकिन साँसें रोक के, चाय की दुकान पर, मन में भगवान को याद करके, दोस्तों के कंधे पर हाथ रख के, पिताजी के साथ सोफे पर बैठ करके, टीवी की दुकान के बाहर भीड़ में शामिल हो, हॉस्टल में टीवी का जुगाड़ करके, बिजली कटने पर बेशर्म हो पड़ोसी के यहाँ जाके, राह चलते कान में रेडियो सटाके, आते जाते स्कोर क्या है पूछ्के नजाने किस किस तरीके से क्रिकेट देखने के इस नये नजरिया का नाम था “सचिन”. इस खिलाडी ने पुरे देश को एक साथ आके क्रिकेट देखना सिखाया, आँखों में जीत के सपने को तैरना सिखाया, ख़ुशी पर एक साथ सब भूल के झूमना सिखाया ! हार की मायूसी में गमगीन होना भी सिखाया ; सचिन आला रे पर कदमों को थिरकना सिखाया !

सचिन क्या था ~ किसी के रूम के दीवारों पर क्रिकेट सम्राट से निकाला गया पोस्टर, या किसी के सिरहाने में अख़बार से काट कर रखे गए हजारों तस्वीर का गुच्छा, या सचिन के बाल-बाल आउट होने से बचने पर धक से रह जाता सीना, सचिन के आउट होने पर रोने सी शक्ल का हो जाना, या सचिन के गलत आउट दिए जाने पर गुस्से से भर जाना ! आखिर सचिन क्या था ! कैसे कोई खेलते खेलते आँखों में बस जाता झुक के फ्लिप, आगे बढ़ के ड्राइव, हुक करके छक्का, नजाकत का स्टेट ड्राइव, छेड़ने जैसे अपर कट, जैसे सब कुछ एक वक़्त के लम्हें कर तरह मन में कैद हो ! जैसे सबने सचिन के साथ दो दशक को जिया है !

सचिन के खेल ने जीवन जीना सीखा दिया, अच्छी गेंदबाजी पर ५ गेंद रोककर अंतिम गेंद पर चौका, धैर्य और संयम ; जैसे हमें कहता जिंदगी के कठिन दौर में रुको समझो फिर आगे बढ़ो , बेबाक बल्लेबाजी हमें निडर बनने को कहता तो बार बार ये कहना की क्रिकेट को मैं रोज सीख रहा , अपने आप में सचिन को कितना बड़ा कद देता ; की हम जीवन में रोज कुछ न कुछ सीखें , हर दिन अवसर है चुनौती है सीखने की कुछ करने की ! सफलता के अम्बर के बीच एक इंसान जो सहज दीखता, दूसरों को प्रेरित करता, सचिन का जीवन हम सब के लिए आदर्श है !

सचिन के साथ वर्ल्ड्कप पुरे देश ने जीता ; बहुत ही मर्मस्पर्शी क्षण था वो और आँसू छलक आये जब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहा था ! सचिन पूरा देश आपकों प्यार करता है, आपने अपने देश का नाम गौरव से ऊँचा किया है ! #

एक कविता इस महान इंसान के लिएsachin god of cricket

कभी हँसे जो मेरी हसरतों पर ..
हमने उन्हें भी सलाम किया …
सब लोग कहते है मुझे खुदा सा ,
पर मेरी ये खता नही मेरे रब ..
तेरी ओर ये नजर रखी,
और बस मैंने तो सपनो को अंजाम दिया ! !

Happy Birthday Sachin 🙂 

tv disease

आजादी २.०

ये कैसी आजादी की माँग है ; ये कौन लोग जो है समय समय पर भीड़ बनके आते है ; देश की आजादी का वर्तमान वर्शन जिसे पसंद नहीं ; मॉडिफाइड स्वराज और आजादी २.० की माँग कर रहे ! “अभिव्यक्ति की आज़ादी” को नई नई परिभाषा देने वाले लोग जो खुद इतना बोल जाते की इस देश में की सहिष्णु समाज भी असहनशील हो उठता !

nationalism india

जिन्हें देश के नाम से, देश के झंडे से नफरत है वो इस देश में अभिव्यक्ति के नाम पर देश के संविधान को धता बताते ; आज हुक्मरानों की ख़ामोशी कल एक बहुत बड़े शोर को बुला रही ! ऐसी पोषित मानसिकता पर मौन रखना बहुत बड़े तूफान को बुला रहा है !

जिस देश की मिटटी आपको जन्म देती, पालती पोसती अगर उसको माँ कहने में शर्म आती है तो आप कतई इस समाज के नहीं हो सकते ; जिस समाज की परिकल्पना आप कर रहे वो इस देश की पृष्टभूमि से अलग है ; कम से कम चंद उपद्रवियों को राष्ट्र के अभिमान को सियासी रूप में परिभाषित करने का अधिकार नहीं है !

राष्ट्द्रोह और राष्ट्रवाद के बीच कतई महीन रेखा नहीं है, एक स्पष्ट विभेद है ; हम जिस राष्ट्र में है उस पर हमें गर्व है, और जो इसका सम्मान नहीं करते वो राष्ट्रविरोधी है !

हमारा टीवी बीमार है या नहीं ये आप स्वंय सोचिये ;
मेरी नजर में मनुष्य एक संवेदनशील और विवेकशील प्राणी है,
कल्पना कीजये उस कृत्रिम दुनिया की …
राष्ट्र धर्म संस्कृति भाषा क्षेत्र जब सब आभासी ही मान लिया जाये,
तो फिर मनुष्य और एक रोबोट में क्या फर्क रह जायेगा ।
कृत्रिम विवेक वाला मानव जिसके लिए किसी भी चीज में फर्क करना महज एक प्रोग्राम सा होगा,
और उस प्रोग्राम का निर्धारण कौन करेगा ?
अगर राष्ट्रवाद का स्वरुप कोरा है एक मिथक है तो,
क्या जरुरत है हथियार, सीमा, और जवानों की,
हमारे कृत्रिम मष्तिस्क में कोई तनाव क्यों आएगा,
जब १००० किलोमीटर दूर देश के भूभाग पर कोई कब्जा कर ले,
क्यों हम उस चीज के लिए चीखेंगे जिस कश्मीर कन्याकुमारी को बस किताबों और कविताओं में पढ़ा,
जो हिमालय मुकुट है और सागर पैर पखारते ऐसी सारी कवितायें तो मिथक है,
वो कहानी जो बचपन में पढ़ी थी क्यों नहीं फाड़ दिया गया वो पन्ना,
जिसमें एक बच्चा खेत में बंदूके बोता है और कहता फसल की तरह,
अनेकों बंदूके पैदा होगी और देश के आजादी में काम आएगी !

अब टीवी बीमार है या हमारी मानसिकता ये स्वंय सोचिये !!

लेखक के निजी विचार ~ Sujit

Mahishasura

महिशाषुर घोटाला …..

आम जनता को अपने त्रस्त जीवन में कब फुरसत है की महिशाषुर की जाति का पता करें और रावण के ननिहाल को खोजे, बस राजनेता सब काम छोड़ इसके पीछे पड़ते रहते ; संसद सत्र में करोड़ों रूपये की बर्बादी अब महिशाषुर की जाति और रक्तबीज का ब्लड ग्रुप पता करने में किया जायेगा !

महिसाषुर गैंग को आगे गेंडास्वामी दिवस, शाकाल जयंती, मोगैम्बो इवनिंग, डॉ डेंग कल्चरल फेस्ट मनाते हुए आप देखेंगे जो फर्जी मुठभेड़ में शहीद हुए थे !

अगर रक्तबीज का ब्लड ग्रुप पता लगाया होता तो वो आज जिंदा होता,सरकार ने सही समय पर इलाज मुहैया नहीं कराया ! महिशाषुर के सेनापति की हत्या हुई है !!

कुम्भकर्ण को नींद की गोलियाँ दी जाती थी इसकी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए !

सीट बेल्ट बाँध ले आप सतयुग में प्रवेश कर रहे ,आज संसद में महिशाषुर मुद्दे पर भारी गहमा गहमी हुई; इसी बीच शुम्भ निशुम्भ ने भी कोट जाने के तैयारी कर ली है, उनका कहना है महिशाषुर उनका सारा क्रेडिट ले जा रहे, उनका हक छीना जा रहा ।!

रामायण का एक श्लोक याद आ रहा – “जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना; जहाँ कुमति तहाँ बिपति निदाना.. ”

महिशाषुर के भैसिया से ऊपर सोचियेगा तब न बुलेट ट्रेन मिलेगा !

लेखक के निजी विचार ~ Sujit

New Year

2016 – नये वर्ष का सफरनामा ….

ये जिंदगी का सफर है जो उम्मीदों से भरा ; सफर में पड़ाव है, सफर में मिलने वाले साथी है, कुछ छूटने वाले साथी है, उनकी यादें है लेकिन सफरनामा कब रुकता है ! गुजरे हुए मुकाम नहीं आते लौट के लेकिन हमेशा यादों की एक सौगात है जो साथ रहता ! ऐसे ही साल दर साल जिंदगी का सफरनामा अपने नए उम्मीदों के साथ बढ़ता हुआ ! कुछ निर्णय है, कुछ नसीहतें, कुछ सीख है तो कुछ अनुभव ! रिश्तें प्यार हँसी ख़ुशी गम चिंता सब का मिश्रित रंग बिना उढ़ेले जिंदगी की सही तस्वीर कभी बनती किया !

शब्दों का सिलसिला यूँ ही अनवरत चलता रहेगा, अपने आप को नए ऊर्जा से भरे, चुनौतियों को स्वीकारें और आगे बढ़ते रहे ! नव वर्ष की शुभकामनाएँ !!

“” बीता जो वक़्त वो यादों का मौसम था,
जाने इस बरस की क्या क्या सौगात है ! “”

New Year

#SK ~ Happy New Year 2016 🎆 🎋

विथ न्यू होप 🙂

happy birthday inbox love

हैप्पी बर्थडे – इनबॉक्स लव ~ 14

happy birthday inbox loveतुमने ही शुरू किया था ये सब !
तुम्हारा वो जीटॉक स्टेटस ..
“हैप्पी बर्थडे टू माय स्पेशल फ्रेंड 🙂 :D”
दो तीन स्माइली के साथ खूबसूरत सा वो मैसेज !

उस दिन तुमने स्पेशल बना दिया था , पुरे दिन तुमने अपने चैट स्टेटस में यही तो लिख रखा था !
मेरे लिये तो यही था बर्थडे गिफ्ट ;
अब मेरी बारी थी ; पर मैं स्पेशल कैसे लिखता इनविजिबल चैट में स्टेटस कहाँ होता ! पर मैंने कुछ भेजा था तुम्हें ~ 12.01 सुबह सुबह “बार बार ये दिन आये …. हैप्पी बर्थडे टू यू ” और सरप्राइज गिफ्ट भी तो ! उसके बाद फिर ये त्यौहार था हर वर्ष कुछ नया कुछ अलग, कुछ मैसेज, कुछ इनबॉक्स में तस्वीरें … कभी नहीं भूलता ये तारीख !

पर तुम भूल गये थे ; एक बार तो झगड़ भी लिया था,
आज तुम्हारे स्पेशल फ्रेंड का बर्थडे है तुम कुछ कहोगे नहीं … अगले दिन तक इनबॉक्स में ख़ामोशी पसरी रही ! फिर एकपल “हैप्पी बर्थडे टू माय स्पेशल फ्रेंड” !
ख़ुशी भी नहीं हुई , स्माइली भी तो लगाना भूल गए थे तुम !
फिर न मैंने याद दिलाया और तुमने भी कोशिश नहीं की !

पर तुम्हारे इनबॉक्स में बार बार ये दिन आये ;
और ” हैप्पी बर्थडे 🙂 ” ये हमेशा की तरह तुम्हें हँसाने के लिये हर साल मैं भेजता रहा ।।

मन ही मन सोचने लगा …
काश हम स्पेशल न होते ….. सिंपल में क्या हर्ज़ था !!

#SK in Inbox Love …  💌 🌾

inbox love in December

Love in December – इनबॉक्स लव ~13

inbox love in Decemberदिसम्बर, धुंध, सिमटी रातें …
दिसम्बर की कुछ यादें !
जल्दी जल्दी शाम का ढल जाना ; हाँ हर बदलता मौसम यादों को भी तो बदल देता ; ये शीत में धुलती रातें, सुने से सड़कों पर धुंधली पड़ती रौशनी ! किसी साल से इसी मौसम की कुछ बातें याद है ? जैसे खुद से ही सवाल कर रहा वो और खुद ही जवाब भी सोच रहा ! किसी यादों में खो जाता वो, कुछ संवाद सा उसके अन्दर चल रहा जैसे …
— इनबॉक्स में —
अच्छा है बहुत ;
क्या अच्छा है ?
स्वेटर लाल रंग का जो फेसबुक पर पिक अपलोड की है !
अच्छा क्या ख़ास है ?
बस जैसे ये स्वेटर तुम्हारे लिए ही बना है ; लाल रंग के स्वेटर में लिपटी सादगी !
हम्म …
आगे कुछ जवाब नहीं मिला !
कुछ रुककर फिर वो कहता पोंड्स का एड कितना अच्छा है न रिश्तों की गर्माहट ; इस मौसम में याद दिलाती !
क्या याद दिलाती ?
जैसे बच्चे से मासूम चेहरे को हाथों से छूना !
हम्म … और कुछ तारीफ में शब्द है ?
शब्द तो प्रेरणा है जो इस सादगी से मिलती ; ये कभी खत्म नहीं होगी !
हर हमेशा कवि और कविता, कैसे सोच लेते इतना !
बस सोच लेता ; कैसे ये सोचा नहीं कभी . .
ओके ओके – आज के लिए इतना ही ;

बीच में रोका उसने – सुनो एक बात थी !

ठण्ड बढ़ रही दिसम्बर में ; वो लाल स्वेटर और लाल स्कार्फ बांध के जाना ! सॉरी लाल टोपी 😛

सो फनी 🙂 स्माइली के साथ !!

जैसे किसी ख्वाब से उठा हो वो ; रात बीतने को आ रही थी ; खाली चैट विंडो ; वही दिसम्बर की रात फिर … नींद की आगोश ! लम्बी सांस लेके बोलता “नाउ इट फील्स लाइक दिसम्बर; अनफोरगेटेबल दिसम्बर” !!

#SK in Inbox Love … With Essence of Winter 🍂🍂