प्रेम …

Loveमैं उससे लड़ता हूँ,
की थोड़ी सी ख़ामोशी तो हो,
तुझे सोच सकूँ किसी नज्म की तरह,
और तुझसे कहूँ तू खूबसूरत है शब्दों सी !

अल्लहड़ जैसे हरदम बोलना,
जैसे हवा आयी हो खिड़की से
और मेज पर से सारे पर्चे उड़ा गयी !

हरदम जिद और जिरह की बातें,
जैसे कोई शरारती बच्चा हो,
माँ की हर बातें दुहरा रहा हो !

नकारना प्यार की बातें,
और हाथ छूने पर झिरक देना,
जैसे लाज से नहायी हुई स्त्री,
कुछ दूर जाके खड़ी हो गयी !

ऐसे कभी देखा नहीं तुम्हें संगीन होते,
हाँ कभी कभार पूछते हो प्रेम क्या है ?

#SK

old things poem hindi

कुछ पुराने सामान ….

old things poem hindiएक दिन मेरे दिये हुये
सब सामान पुराने हो जायेंगे,
टूट जायेंगे या अब नहीं रह जायेंगे,
वैसे की तुम साथ लेकर चलो इसे ।

किताबो की जिल्द उघड़ी होगी,
या काटा होगा चूहों ने कभी,
या हमारे रिश्तों की तरह,
वक़्त की दीमक ने खाया होगा इसे ।

वो तारीख बताता कैलेंडर,
जिसमें एक तरफ लगी होती फ़ोटो तुम्हारी,
क्या करते होगे उसका तुम बरस बीत जाने पर,
शायद फेंक देते होगे तुम,
हाँ कई सालों का इकट्ठा हुआ होगा,
मुझे तो आह निकलती,
मुझसे न फेंका जाता कभी ।

वो पुराना मोबाइल,
हाथ से छुट कर कई दफा गिरा होगा,
अब तो नहीं रखते होगे तुम साथ इसे,
बाजार में रोज दफा नया ही नया आता है,
उस समय भी वो नया सा था अपने हिसाब से ।

देखो न एक उम्र बीती है,
मैं भूल भी रहा कई चीजें,
बरसों हुए वो टेडी बियर तो मर गया होगा शायद,
पा गया होगा मुक्ति सब रिश्तों से,
मैं भी उसी तरह खड़ा हूँ,
सब पुराने सामानों की तरह,
दे दो मुक्ति सब बंधनों से,
की तेरे नाम सुनकर कोई स्मृतियाँ न आये,
तेरे चेहरे जैसी कोइ आकृति,
आँख बंद करने पर न बने,
पुराने हर सामान को जिस तरह तुमने छोड़ा,
वैसे ही दे दो मुक्ति हर रिश्तों से मुझे ।

#SK

night rain hindi poetry

पूरी रात ….

पूरी रात ही बरसी बारिश,
पूरी रात बूंदों का शोर था !

पूरी रात जो ख़ामोश रहा,
पूरी रात वो कोई और था !

पूरी रात रहा कोरा ही कागज़,
पूरी रात नज्म पर बूंदों का जोर था !

पूरी रात खिड़की के काँच पर फिसली बूंदे,
पूरी रात उसका चेहरा हर ओर था !

पूरी रात ही भींगी खाली सड़के,
पूरी रात सूना सूना हर मोड़ था !

पूरी रात ही बरसी बारिश …

#SK

new love hindi poem

इश्क़ ही है ..

new love hindi poem
वो जो रातों को अधजगा सा रखता,
अजनबी संग देखो सब भेद है कहता,
यूँ ही मन ही मन कुछ गुनगुनाता है रहता !

ये जो कुछ कुछ अपना सा लगने लगा है,
ये देखो कौन अब कुछ नया चुनने लगा है,
खुद से मन जो कुछ अब कहने लगा है !

हाथों की लकीरों का ये खेल सा लगता,
या बरसों का छुपा कुछ भेद सा लगता,
या रिश्तों की नई डोर का संयोग सा लगता !

वो जो रातों को जो अधजगा सा रखता,
शायद आधा अधूरा सा सही इश्क़ ही है !

#SK
Night Moon & You Hindi Poem

रात और चाँद …

ये कैसी शरारत करते हो,
रात तारों के साथ ऊँघने छोड़ जाते हो,
तेरे जाने के बाद एक तारा,
पास आ बैठता,
कन्धों पर हाथ रख,
पूछता है तुम्हारी कहानी,
मैं उससे झूठ कहता की,
तुम एक दिन आने को कह गए हो,
उसकी हँसी चिढ़ाती है मुझे,
जैसे उसने बात न मानी हो मेरी !

किसी रोज आके दो घड़ी,
पास तो बैठो,
हाँ रात घनी हो बिना बादलों वाली,
उस तारे को दिखाना है मुझे,
जड़ना है उसके मुँह में ताला,
उसको पता चले जमीं पर चाँद होता है ।

ये कैसी शरारत करते हो;
रात तारों के साथ ऊँघने छोड़ जाते हो !

#सुजीत 

social media troll

बातें गाली गलौज की …..

सोशल मीडिया और गाली गलौज ….

बहुत अच्छा प्रश्न है ; व्यापक है ; समस्या है ! लेकिन रोज एक ही बात बोलना की गाली गलौज हो रहा , ये कौन लोग है , वो कौन लोग है ! बीजेपी कांग्रेस व्हाट्सप्प फेसबुक तू तू मैं मैं ! आखिर कब तक यही जुमला फेंकते रहेंगे ये कौन लोग है ये कौन लोग है – आखिर लोग तो निश्चित तौर पर मंगल ग्रह के नहीं होंगे जो किसी न्यूज़ पर गाली – गलौज करने आते होंगे ! गाली भी लेवल लेवल के है – पढ़े लिखे पत्रकार जब देश के प्रधानमंत्री को नसीहत देते की खुनी पंजा वाला आदमी आज अमरीका घूम रहा इत्यादि इत्यादि खैर ये तो बुद्धिजीवी वर्ग वाला गाली है इसका तो कोर्स होता है ये सर्टिफाइड टाइप की गाली इसको आपने आईफोन से ट्वीट किया होगा वजन होगा इसके उलट में कोई कार्बन और लावा से फ्लैट भाषा में गाली गलौज कर जाता है तो समस्या है होनी चाहिए ! इस विषय को आगे नहीं बढ़ाते , मूल बिंदु पर चलते। ….

संदर्भ पर आते है गाली गलौज का कोई समर्थन नहीं कर रहा ; हम समस्या के जड़ में नहीं जाते सोशल मीडिया का प्रादुर्भाव विगत ५ सालों में बढ़ा है ; मोबाइल और इंटरनेट भी क्रांति की तरह आया तो समस्या यहीं से शुरू होती विज्ञानं सृजनात्मक है तो विध्वंशक भी है, हथियार बना सेना इस्तेमाल करती अब समाज में कोई उसी हथियार से उपद्रव करता डराता धमकाता तो हमने क्या किया, हथियार पर निबंध लिखा , नहीं ! हमने कानून बनाये, लोगों को जागरूक किया, स्कूल से कॉलेज में उस संविधान के बारे में बताया की सामाजिक उपद्रव अपराध है !

आइए चलते है इंटरनेट विहीन समाज की ओर ये कहीं भी हो सकता पटना बनारस दिल्ली कहीं भी ; क्या आपको गली के मुहाने पर बैठे लड़कियों पर सीटी बजाते लड़के नहीं दिखे, क्या कॉलेज के गेट पर बाइक चमकाते लड़के नहीं दिखे, आप पर फब्ती कसते लोग नहीं मिले, स्कूल में आपके प्रश्न पूछने पर अभद्र भाषा में बोलने वाले लड़के पिछली बेंच पर तो जरूर ही मिलें होंगे जो कहते होंगे “साला बड़ा आया पढ़ने वाला” सड़क पर ओवरटेक करने पर पीछे से आवाज तो जरूर आई होगी “बाप का सड़क समझता है **** “. ; ये समाज का एक तत्व है , एक हिस्सा है जिसके दिमाग में ये अभद्रता पलता है ! और इन्ही सब किसी बात के बढ़ने पर हम उस लड़के के पिताजी के पास, या स्कूल के हेडमास्टर के पास, या रोड पर बाता-बाती पर पुलिस के पास जाते या गए होंगे ! इसका मतलब एक उपाय है कानून है व्वयस्था है इस अभद्रता के खिलाफ ! शिक्षा बढ़ी जागरूकता बढ़ी और कमोबेश ही सही समाज में सुधार हुआ !

अब उसी समाज उसी तत्व उन्ही लोगों को एक 3जी सिम, एक मोबाइल या लैपटॉप, वाय-फाय राऊटर से जोड़ देते, एक नया आयाम खुल गया पहले तो सामने मोहल्ले के लोग थे टिप्पणी करने के लिए अब तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक संसद से लेके विधान सभा तक न्यूज़ से लेके सिनेमा तक खेल से लेके खिलाड़ी तक, ये समस्या क्या बीजेपी कांग्रेस तक है ? ट्रोल तो हर चीज में पनपता जा रहा !

समस्या वहीँ है हमने इस समाज को इंटरनेट का झुनझुना तो पकड़ा दिया पर बजाए कैसे, कब , कितना , क्यों , कहाँ ये नहीं बताया न सिखाया ! क्या स्कूल से कॉलेज तक कोई पाठ्यक्रम शामिल हुआ नागरिक शास्त्र की किताबों का संसोधन हुआ जहाँ सड़क के नियम के साथ मोबाइल चलाने और गाली देने न देने की कुछ नियम हो ! समस्या लोग नहीं व्वयस्था है ; और इसी व्वयस्था की खामी का कोई राजनैतिक उपयोग-दुरूपयोग अपने अपने गणित के हिसाब से इस इक्वल टू बटा जीरो कर रहे !

अगर बुद्धिजीवी मानते गाली गलौज पर रोज दू चार हजार वर्ड का आर्टिकल लिख सकते तो इसके निदान पर क्यों नहीं , क्यों नहीं सब मिले के एक मसौदा बनाए सोशल मीडिया के उपयोग , इसके प्रबंधन, इसके नियम कानून परिभाषित हो, इसके दुरूपयोग की सीमा , सोशल मीडिया को जागरूकता का विषय बनाना, सोशल मीडिया नीति आयोग भी बना डालिए, सोशल मीडिया को पाठ्यक्रम में शामिल करना, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग क्यों न हो जो उपद्रवी कंटेंट को रोके, सोशल मीडिया और राजनैतिक उपयोग पर विधान क्यों न बने, सोशल मीडिया पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में मीडिया या कोई अन्य संस्था कैसे उपयोग करें इस पर क्यों नहीं कोई पहल हो !

इस पर भी मीडिया मार्च निकाल कर सरकार और संसद तक जा सकती ; एक मोमबत्ती इंडिया गेट पर इसी गाली गलौज के नाम ही सही या मुन्ना भाई के तरह बापू के राह पर गाली गलौज वालों को गेट वेल सून भी कहा जा सकता ! वो बीमार है उनके अच्छे होने की कामना तो कर ही सकते !

लेखक सोशल मीडिया एक्सपर्ट है (निजी राय ) – सुजीत कुमार

आईये एक मुहीम अपनाते
” सोशल मीडिया पर जो लोग गाली गलौज करते वो बीमार है ! उन्हें गेट वेल सून कहिये ! “

your face hindi poem

तेरा चेहरा अब …

your face hindi poemहृदय का एक कोना,
तुम्हारा एक हिस्सा था वहाँ,
तेरा चेहरा और कई तस्वीरें,
भरने लगा है वो,
उलझनों से अब,
जद्दोजहत तो होती है,
अकेले उन्हें हटाने की,
शायद रख पाता तुम्हें पर,
तुमने भी कोई कोशिश नहीं की !

ऐसे तो बसी है मन में,
एक सुन्दर कृति पुरानी,
रूखे रूखे रुख ने तेरे,
कुछ उसको भी तो घिस दिया,
जैसे रेगमाल रगड़ दिया हो किसीने,
कभी मेरे शब्दों के आईने से देखना,
तेरा चेहरा अब वैसा मासूम नहीं रहा !

DILUTE LOVE POETRY

किसी भी लहजे में नहीं ….

DILUTE LOVE POETRYकिसी भी लहजे में तो नहीं कहा,
की तुम्हारी कई बातें अच्छी नहीं,
झुंझलाहट भरी थी चुप्पी तेरी,
प्रेम में डूब के कैसे कहता की,
कुछ द्वेष भी तो पलने लगा अंदर,
कैसे बदलने लगा था व्वयहार तेरा,
बदल के तुम वो नहीं रहे अब,
या बदल के अब कैसे हो गए,
यहाँ कौन निर्धारण करेगा,
मेरा या तुम्हारा कर्म हो कैसा,
कोई तो तय नहीं कर सकता समयसीमा,
कौन किससे कबतक जुड़ा रहे,
या छुड़ा के जा सकता है दामन भी,
कैसे उस असंतोष को जताया जाता,
की तुम सहज ही रहे इस बिखराव पर,
और मेरा मन वेदना से भरा था !

किसी भी लहजे में तो नहीं कहा,
कह ही नहीं पाता शायद सामने,
हृदय मैं उठते क्षोभ के लिए बस,
मैं कुछ कवितायेँ ही लिख सका !

#SK

sujit hindi poetry on night talk

और तब …

sujit hindi poetry on night talkऔर तब
से आगे का किस्सा ?
जहाँ रात को रोक के कल,
हम और तुम कहीं चले गए थे,
उस चाँद को गवाही बनाके,
की फिर इसी वक़्त रोज,
यहीं आ बैठेंगे और पूछेंगे तुमसे,
और तब ?
थोड़ी देर तुम सोचो,
थोड़ी देर मैं भी कुछ,
फिर तुम भी कुछ कहना,
फिर मैं भी सब कुछ कहता,
जब कुछ कहने का मन नहीं होता,
तुम्हें ही सोचते हुए तुमसे कह लेता,
और तब ?
वो चाँद भी ऊब जाता होगा कभी कभी,
रोज वहीँ से वही बात सुनकर,
चाँद भी तो रोज रात संग ऐसे ही बातें करता होगा,
शायद वो भी पूछता होगा “और तब ?” !

 — #Sujit Poetry