Atonement of Words – IN Night & Pen / Inbox Love -8

एकदम रात का सन्नाटा, ध्यान से सुनो,
दिन के दबे सिसके बातों की प्रतिध्वनि;
कहीं ख्वाब जलने की तो कहीं उम्मीद सुलगने की गूँज !

उस दिन काफी खामोशी के बाद जब उसने कुछ सुना;
वक्त की झुंझलाहट शब्दों में उतर गयी उसके;
और … बात ; .. शब्दों में टूटे हुए मन को कैसे लिखा जा सकता;
इसे तो बस महसूस किया जा सकता;

प्रतिउत्तर सुनकर भर आया था दिल उसका,
जैसे कैसे उस भूल का प्रायश्चित कर दे ….
विह्वल मन कुछ प्रतिक्रिया कर खामोश हो गया !

और वो सोचता रहा, चंद शब्दों का हक तो हो सकता था,
या समझा जा सकता वक्त की झुंझलाहट को !

मन पुनः यथावत था कुछ हँसी बिखेरने की कोशिश में,
कुछ टूटे हुए लम्हों को जोड़ने में,
कैसे बिखेर दे यादें आखिर… कुछ भी या बस यही तो.. उसका निशानी बाँकी थी मेरे पास !
मैं इनबॉक्स में कुछ स्माइली उड़ेल कर खुद बीतते रात की तरह खामोश हो चला था !

SK in Night & Pen / इनबॉक्स लव !!