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Poetry

GTALK – Inbox Love 7

डायरी ही थी अपनी बातों का ,
मेल बॉक्स के कोने में संदेशों के प्रवाह का छोटा सा चैट बॉक्स !

हरे रंग का चिन्ह तुम्हारे होने का और आने का ;
मैं वाइट इनविजिबल …जैसे हूँ भी .. नहीं भी.. !!

कभी ठिठक सा जाता था देख के लाल रंग के चैट स्टेटस के साथ उस नाम को ;
या तो होते थे या नहीं ; हाँ कभी कभार तुम्हें देखा था !
“डोन्ट डिस्टर्ब” लिख के बैठे लाल बत्ती से जहाँ सब रुका हुआ सा लगता था और हमेशा पूछ ही लेता था क्यों नहीं करे डिस्टर्ब ??
अरे नहीं …
बस ऐसे ही …
आपके लिये नहीं , कर सकते कभी भी ।

रोज एक नया कौतुहल था जानते क्या ?
माउस को तेरे नाम पर होवर करके देखना क्या आज वहाँ कुछ नया लिखा है जैसे …

“माय लाइफ माय रूल्स”
“हैप्पी इन माय ओन वर्ल्ड”
“लीव मी अलोन”
“साइलेंट”
“ब्लेंक”

और कभी कभी केवल स्माइली का गुच्छा । अक्सर ही बदलता रहता था कभी कभी महीनो वही परा रहता था ; अब तो यादें भी धुंधली हो गयी नजाने क्या क्या लिखा था कब से ।।

ऐसे ही सब कुछ बदल गया ना ..
स्मार्टफोन .. वो गूगल चैट हैंगआउट हो गया ।
पर मैंने चैट को हैंगआउट नहीं बनने दिया !
उस चैट विंडो में अब भी कुछ बातें रखी है ।

वो ऑरेंज वाला रोबोट स्टेटस ना बड़ा फीका सा है ; ऐसा लगता की दूर जा के खो गया है कोई ;
कोई दिन रात कब जाने कौन है नहीं है … इसने वो ग्रीन रेड इन्तेजार गुस्सा सब सिलसिला ही खत्म कर दिया ।

हाँ ये सबकी मौजूदगी का अहसास कराता रहता है ! बस ऐसे जैसे … खामोश ही सही कोई आसपास तो है ।

Inbox Love Bring By – Sujit

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Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/