अलविदा सावन – Night&Pen

पूरा चाँद फलक पर है
बीते सावन को
अब अलविदा कहना है ।

आज पूरा चाँद जैसे अलविदा कह रहा हो किसी को, भींगे मन में…

जैसे कुछ बिछड़ रहा हो कोई गीत जैसे बज कर अब सन्नाटे में खो गया हो ।

एक गीत जिसे फिर सुनना है उसी फुहारों के बीच, बारिश की शाम, भीगें मन से, इश्क़ की छुअन से ।
सावन फिर आएगा ….

जब घूंगरूओं सी बजती हैं बूंदे
अरमा हमारे पलकें ना मूंदे
कैसे देखे सपने नयन, सुलग सुलग जाये मन
भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन… ।।।

#SK

 

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज