Night & Pen Poetry

Atonement of Words – IN Night & Pen / Inbox Love -8

एकदम रात का सन्नाटा, ध्यान से सुनो, दिन के दबे सिसके बातों की प्रतिध्वनि; कहीं ख्वाब जलने की तो कहीं उम्मीद सुलगने की गूँज ! उस दिन काफी खामोशी के बाद जब उसने कुछ सुना; वक्त की झुंझलाहट शब्दों में उतर गयी उसके; और … बात ; .. शब्दों में टूटे हुए मन को कैसे […]

My Voice Thoughts

सियासत ए राजधानी …

दिल्ली जहाँ सियासत कभी खत्म नहीं होती ! हर सुबह कई वादों की सौगात लेके आती ; तो शाम बिखरे वादों पर कहकहे लगाती ढल जाती ! राजनीती शास्त्र भी है शस्त्र भी उपयोगिता पर निर्भर है !! विरोध तो स्वरुप है चिंतन का ही ; और एक प्रगतिशील चिंतन के लिए आवश्यक है विरोध […]

Poetry

दूर से ये रिश्ता …

बहुत दूर से ये रिश्ता, धुँधला धुँधला सा लगता, कभी कभी आकर वो इसे, इक नाम दे जातें है ! हाँ में रुकसत भी नहीं करता, ना ही थामता हूँ आगे बढकर, इक दफा उब कर दूरियों से, हमने बंधनों की सिफारिश की थी ! क्या समझाया था उसने, या समझ पाया था मैं जितना, […]

Night & Pen

Reprise Something – Night & Pen

बहुत द्वंद और एक बोझ जैसे पर्वतों की श्रृंखला, और रेगिस्तान सी राह में दूर जाता एक राही; विस्तृत अथाह सी राह में कभी इतना पीछे रह जाता; की चलना मुश्किल सा प्रतीत लगता ! कब तस्सली हो, भागते भागते ! कितने सवाल है ….. फैसलों पर .. क्योँ ऐसा लगता मौसम बेजार हो इर्द […]

Poetry

Not as a Stranger – Night & Pen

इन उम्मीदों की मंजिल क्या है .. ये सवाल अपने आप से पूछता अक्सर वो;वर्तमान से उस आने वाले समय की परिकल्पना कैसे उमड़ रही ! जैसे वो कहा रहा – मैं नहीं जानता इस पार दूर खड़ा, देखता लहरों को मन में आते और जाते,ज्ञात नही है मुझे, कैसा है उस पार का तट; […]

Random Thoughts Thoughts

4th Floor Thoughts !

The Age of Orthodox thinking…But where we stand; Our Country lost the credentials of New Facet of Innovation. Are we facing the Mind Drain or Influenced with Amplification of Physical Amenities and Glitz of Modernisation? “On 4th Floor in Front of PC; the thoughts which create anxiety in mind, Questioning with our soul. Our doing […]