Poetry

किस उल्फ्तों में खोये रहते हो ?

यहाँ जिंदगी से जी नहीं भरता,
तुम किस उल्फ्तों में खोये रहते हो !

उदास शाम में देखों लौटते चेहरों को,
सब आगोश है नींदों के ही इन पर छाये हुए !

इक कयास सा है मन में कुछ भूलने का,
या विवश है मन यादों में पल पल खोने का !

कुछ धुनें तलाश लेता कुछ पल गुनगुनाने को,
कहाँ दिखता कोई संगी साथी दो पल मुस्कुराने को !

विकल मन था चाह लिये बीते किस्से सब कह जाने का,
किस गुरुर में तुम खो गये किस्सा था तेरे अजनबी हो जाने का !

कितने ख्वाबों रातों को भुला नयी सुबह दबे पाँव आती,
कब जी भरता जी के जिंदगी, और किस उल्फ्तों में तुम खो गये !

#SK in Life Poetry ….

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Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/