Poetry

अब जो भी ख्वाब आ जाते …

dreamsजिस्म थक जाता है दिन से रूबरू होकर …
नींद से पहले जो आधे अधूरे थोड़े से,
अब जो भी ख्वाब आ जाते मैं उन्हें समझा दूँगा !

आठ पहर शिकायतों के लिये क्योँ खोजे,
वक्त दो पल की ही मिलती है मुस्कुराने को !

कहीं बहुत दूर इस जहाँ से जा के,
कभी फुर्सतों में खो के सोचेंगे..
क्या गुनाह किया.. क्या दुःख था !

क्या बातें थी जिसे सोचा ना जा सका;
क्या बंदिशे थी जिसे तोड़ा ना जा सका !

हर वादों से निकल कर कह गया,
बिन उम्मीदों के सब राह चुन लिया !

उलझनों को शब्द का पनाह है बस मंजूर,
गुफ्तगूँ बयाँ एक अदद खामोशी कैसी,
अब जो भी ख्वाब आ जाते मैं उन्हें समझा दूँगा !

: – सुजीत

Image Credit : http://www.onislam.net/

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/