Poetry

कभी आते नहीं – The Contrast of Life !!

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गाँव में ख्वाब पुरे होते नहीं,
शहरों में नींद कभी आते नहीं !

फोन इतने बड़े हाथों में आते नहीं,
बात दिलो तक अब जाते नहीं !

चुप से सुनते हरदम पुराने धुनों को,
अब कभी खुल के यूँ गुनगुनाते नहीं !

चलते फिरते पांवों के छालें दिखते नहीं,
अब घासों पर भी दो कदम चल पाते नहीं !

लंबी लंबी घने हरे पेड़ थे कितने,
अब गमलों में भी बोनसाई मुरझाते नहीं !

कभी फूसों छप्परों में रह जाते थे संजीदा,
ऊँचे दीवारों और छतों में भी बस पाते नहीं !

करते थे वादें कैसी कैसी लंबी,
फिर कभी लौट के वो आते नहीं !

कैसे खिलखिलाते थे नोक झोंक पर भी,
अब बीत जाती उत्सव सभी फिर भी मुस्कुराते नहीं !

रो जाते थे छोटी सी किसी बातों पर,
अब अंदर की बेचैनी कभी कुछ बताते नहीं !

घंटों बीत जाती थी कितनी बातों में तभी,
अब शब्दों के सहारें लेकर कुछ भी छुपाते नहीं !

Sujit ~ The Contrast of Life

Image Credit : http://fineartamerica.com/ 

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/