□ ■ Dreams of Night □ ■

सवा पहर का रात वो ..वक्त टूटी ..नींद छुटी,आवाज दे गए थे शायद,देखा सिरहाने कुछ लब्ज थे परे,गुनगुनाये तेरे, कह गए बात कुछ ! बीती रात का भ्रम सही या,या …

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अल्ल्हर बातें !

एक अल्ल्हर बातें है जैसे, सपने का पलना हो जैसे !अठखेली हवाओं जैसी !बावरी मन चंचल हो जैसी ! आशाओं की डोरी सी !बातें करती पहेली सी, एक तस्वीर …. …

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