Poetry

अब जो भी ख्वाब आ जाते …

जिस्म थक जाता है दिन से रूबरू होकर … नींद से पहले जो आधे अधूरे थोड़े से, अब जो भी ख्वाब आ जाते मैं उन्हें समझा दूँगा ! आठ पहर शिकायतों के लिये क्योँ खोजे, वक्त दो पल की ही मिलती है मुस्कुराने को ! कहीं बहुत दूर इस जहाँ से जा के, कभी फुर्सतों […]

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□ ■ Dreams of Night □ ■

सवा पहर का रात वो ..वक्त टूटी ..नींद छुटी,आवाज दे गए थे शायद,देखा सिरहाने कुछ लब्ज थे परे,गुनगुनाये तेरे, कह गए बात कुछ ! बीती रात का भ्रम सही या,या सुबह होने का सच था खड़ा ! चले गए थे .. ख्वाब के तरह..वो ख्वाब जो टूटता है रोज,संवर जाता रोज अपने टुकड़े सहेज के,फिदरत […]

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अल्ल्हर बातें !

एक अल्ल्हर बातें है जैसे, सपने का पलना हो जैसे !अठखेली हवाओं जैसी !बावरी मन चंचल हो जैसी ! आशाओं की डोरी सी !बातें करती पहेली सी, एक तस्वीर …. ख्वाबो में एक तस्वीर सी बनती,हया धड़कन के पहलु में छुपती,झुकी नजर में शर्माती हँसती,नाजुक मन आँखों में सिमटी ! एक ख्वाब …कभी इन्तेजार में […]