आज  फिर सदियों  के बाद वही पुरानी आहट सी  थी !

sound-of-footstepsआज फिर सदियों के बाद वही पुरानी आहट सी थी,
जो भुला नहीं हूँ अब भी जेहन में बची एक हसरत सी थी ।

कुछ दो शब्दों पर तर हो गयी आँखे ,
सो गयी कब नींद में बोझिल ये आँखे ।

किसी अजनबी के तरह तुम तो लौटे नहीं थे,
लौट के उन राहों में फिर जाने की मेरी ही चाहत नहीं थी ।

रूबरू भी थे सामने तुमसे कुछ नजरें चुराए भी थे,
छुप जाये इन चेहरों की उदासी ऐसी साजिश सी थी ।

कह ना सका अब ना लौट आना फिर;
यूँ हरदम मेरी मिन्नतों की ख्वाहिश सी नहीं थी ।

फिर सुबह यादों की पुरानी आहट सी थी,
किसी सफ़र पर जाने की मुस्कराहट सी थी ।

अब भी दबी बसी पुरानी कोई चाहत सी थी,
उन क़दमों की वही पुरानी आहट सी थी ।

# SK .. Poetry Continued … !!