Bhagalpur Bihar - Land aside ganga
Poetry

हौसलें है .. सब रवानी देखते है !

शहर के उस ओर का भूभाग, जहाँ हर साल बाढ़ आता, घर बह जाते, सारा जमीं समंदर हो जाता, फिर भी हौसला है उन लोगों का फिर उजड़े को बसाते और जीवन को जीने लौटते ! एक कविता इसी संदर्भ में ~ चौथी मंजिल से शहर के लोग नजारे देखते है, मिटटी, पानी के घरोंदों के […]

Poetry

मंदिर की घण्टियाँ …..

बचपन में इस मंदिर में आके हाथों को ऊपर करके इसे छूने का प्रयत्न करते थे ; तभी पीछे से कोई आके गोद में उठा के हाथों को पहुँचा देता ; कुछ बरसों के बाद दुर से दौड़ के आते ही थोड़ा कूदने पर हाथों को ये घंटियाँ छु जाती थी । बरसों बाद अब […]

Poetry

परछाइयाँ – Shadow of a Soul

परछाई सी थी साथ साथ चलता मालूम होता था ; जैसे एकपल हाथ छू गया होगा तेज क़दमों में ; तूने समझा उसकी साजिश सजा में हाथ छुड़ा लिया ; बस वहीँ ठिठक कर रुक गया था वो आगे नही गया ; सर पर धुप थी खड़ी परछाई उसकी पैरों में आ पड़ी ; पर […]

Poetry

आज  फिर सदियों  के बाद वही पुरानी आहट सी  थी !

आज फिर सदियों के बाद वही पुरानी आहट सी थी, जो भुला नहीं हूँ अब भी जेहन में बची एक हसरत सी थी । कुछ दो शब्दों पर तर हो गयी आँखे , सो गयी कब नींद में बोझिल ये आँखे । किसी अजनबी के तरह तुम तो लौटे नहीं थे, लौट के उन राहों […]

Poetry

ख्वाबों की भी कोई दुनिया है क्या ?

खामोश जुबाँ से हो जाऊँ अजनबी ; या सब कहके बन जाऊँ मैं गुमशुदा ! मैं अब रोज दुहरा नहीं सकता .. बीती बातों का किस्सा फिर से ! कई बरस बीता कितना, मुझे तो हर दिन हर लम्हा याद है ! लगता है ना कहानियाँ हो किताबों की, वो अल्फाज़ वो शिकवा वो यादें, […]

Night & Pen

An Autumn Dreams – In Night & Pen With #SK

कल की दबी बिसरी झुंझलाहट; सुबह भी जारी थी सीढ़ियों से उतरते, घुमावदार बोझ सी लगती, ये चडाव और उतार सीढ़ियों की !झुंझलाहट उतार भी दे किसपर; उसपर जो अनसुना था मेरे बातों से ! शाम सड़क पर जैसे साल का अंतिम पड़ाव, उसके बचे कुछ महीने !मौसम भी जैसे यादों का एक कोना छुपाये, […]