Poetry

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं ….

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं
चुपचाप यूँ ही कहीं ..
खामोशियों से लड़ते हुए,
थककर बहुत ऊब कर बैठा हूँ …
नदी के किनारे कुछ दुर से,
बलुवा जमीन पर हवा थिरक कर
दिन भर के उमस से गीले हुए बदनों पर टकराकर
एक ऐसी ठंडक दे जाती ,
जैसे गर्म तपते दिन को चुपचाप सहलाकर
किसीने ढलने को कहा हो |
दिन की यायावरी कर,
हर शाम से मेरी यारी है !

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/