Poetry

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं ….

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं चुपचाप यूँ ही कहीं .. खामोशियों से लड़ते हुए, थककर बहुत ऊब कर बैठा हूँ … नदी के किनारे कुछ दुर से, बलुवा जमीन पर हवा थिरक कर दिन भर के उमस से गीले हुए बदनों पर टकराकर एक ऐसी ठंडक दे जाती , जैसे गर्म तपते दिन को […]

evening & sunset poetry
Poetry

शाम की व्याख्या …..

एक मित्र ने शाम की एक तस्वीर पर कुछ लिखने को कहा, कवि अनेकों नजरिये से परिभाषित कर सकता किसी चीज को, तो शाम की व्याख्या कुछ इस तरह … १. (कुछ शायरी के लहजे में ) एक मुक्कमल शाम की तलाश में, कितने बार डूबा है ये सूरज ! २. (प्रेम और विरह के […]