Poetry

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं ….

इस शाम में उदासियाँ लपेट मैं चुपचाप यूँ ही कहीं .. खामोशियों से लड़ते हुए, थककर बहुत ऊब कर बैठा हूँ … नदी के किनारे कुछ दुर से, बलुवा जमीन पर हवा थिरक कर दिन भर के उमस से गीले हुए बदनों पर टकराकर एक ऐसी ठंडक दे जाती , जैसे गर्म तपते दिन को […]