Dad Diary

Dad’s Diary – 1

कहते है बच्चा जब सोया रहता और हँसता तो वो भगवान से बात करता , भगवान बच्चे को हँसाते दुलारते ! बच्चा जब तक अबोध रहता वो इस दुनिया के अलावा किसी और दुनिया से संवाद में भी रहता है और धीरे धीरे उसका जब ये सम्पर्क खत्म होता वो इस दुनिया के जीवन चक्र में सम्मिलित हो जाता !

Dad Diary

एक पिता के लिए ख़ुशी का क्षण होता जब छोटा बच्चा थोड़ा रो के जल्दी सो जाता, आप उसके रोने और चुप होने के अंतराल से ही बस पता कर सकते की उसे भूख लगी, उसे कुछ और समस्या तो नहीं उस अबोध के लिए रोना ही हथियार है , भूख लगे तो रोना, पेट दर्द हो तो रोना, बिछावन गिला हो तो रोना, रो के वो संवाद करता और हम उसके रोने से कुछ अंदाजा लगाते की हाँ ये कह रहा वो ! छोटे बच्चे को पालना कौतुहल, जिम्मेदारी और नए अनुभवों को लेके आता !

आप नए नए बेसुरे गीत गाते उसे सुलाने को, टूटे फूटे शब्दों की लोरी सुनाते उसे नींद में लाने को, अजीब अजीब जैसी आवाजें निकालते, तरह तरह का मुँह बनाते उसे बहलाने को ! वो अपने पांव से कम्बल को धकेल देता और रात में आप बार बार उठ के वापस उस कम्बल से उसे ढक देते !

हर जरुरी काम के ऊपर आप अपने बच्चे के साथ समय बिताने को तरजीह देने लगते ! यही जीवन का बदलाव है और जिंदगी की खूबसूरती !

From Dad’s Diary – #SK

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज