vartalaap hindi poem
Poetry

वार्तालाप ….

vartalaap hindi poemवार्तालाप बस दिनचर्या की तरह,
जैसे अधूरी ख्वाहिशों की सेज हो,
कोई समझौते की बंदिश है इसपर,
या शब्दविहीन तल्खी हो कोई अंदर !

रोज खिड़की से दिखती सुबह,
और झुरमुटों में डूब जाती शाम,
बिना कुछ बातों के कैद सी है
अनकहे बातों की लम्बी दास्तान !

वार्तालाप विहीन बीतते दिनों को,
इंतजार है बोलती हुई सुबहों का !

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/