महामारी में मानवीय संवेदनाओं की आवश्यकता …

Follow SOP … Ensure Preventative Measure in COVID-19 !!

क्या इतने शब्दों को लिख देना ही पर्याप्त हो सकता महामारी से लड़ने के लिए ;

आज जहाँ परीक्षाओं पर पक्ष विपक्ष आमने सामने है | शिक्षण संस्थानों में नामांकन एवं अन्य प्रक्रियाओं का दौर चल रहा है साथ ही साथ महामारी के बढ़ते हालात भी चिंताजनक हो रहे | महामारी ने पुरे विश्व को जैसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया ऐसे हालात में संस्थानों को सहयोगात्मक एवं मानवीय संवेदनाओं को सामने रख के विभिन्न प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के दिशा में सोचना आवश्यक है !

परिवहन की सुविधा, छात्र कर्मी एवं उनके परिवार की सुरक्षा, महामारी से बचाव के उपाय इत्यादि को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है ! साथ ही साथ प्रबंधन से महामारी से उत्पन्न हालातों पर लचीलापन और सहयोगात्मक रुख अपनाने की अपेक्षा है |

नामांकन, परीक्षा या अन्य प्रक्रियाओं के समयसीमा में इस बात को भी समाहित करना आवश्यक है कि SOP पालन में क्या पर्याप्त उपाय है जैसे कोई छात्र थर्मल स्कैनर में उच्च तापमान से ग्रसित है तो क्या उसे पर्याप्त अवसर दिया गया कि वो पुनः नामांकन के लिए आ सके ? क्या कोविड के लक्षणों वाले या ग्रसित छात्रों के लिए परीक्षा, नामांकन के पुनः अवसर के लिए पर्याप्त प्रावधान है | अगर SOP को चुनावी नारों के तरह लिखते रहेंगे तो इस महामारी में अनेकों लोगों को संक्रमित होने के लिए मजबूर किये जाने जैसा होगा ! संस्थानों में उपरोक्त प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के दौरान महामारी संक्रमण से ग्रसित होने पर क्या उपाय हो | हेल्पलाइन नंबर, वैकल्पिक उपाय, विशेष समय अवसर, समयसीमा में बढ़ोतरी के प्रावधान इत्यादि तथ्यों के बारे में भी सोचना होगा प्रबंधन को ! महामारी ने मानसिक रूप से हम सभी को प्रभावित किया है कार्यस्थल पर भय मुक्त वातावरण में कार्य करने के लिए आवश्यक है एक संतुलित व्यवस्था जिसमें सभी के हित और सुरक्षा का ध्यान रखा जाय !

तकनीक का अहम योगदान हो सकता इस महामारी में विभिन्न संस्थाओं के कार्यकलाप को सुरक्षित पूर्ण कराने में; अधिकांश कार्य जहाँ इन्टरनेट, ऑनलाइन पेमेंट, मोबाइल एप, सोशल मिडिया मददगार हो सकता उनको उपयोग में लाकर हम सामाजिक दुरी स्थापित करने के साथ साथ संक्रमण के खतरे को भी कम कर सकते !

विश्व के लिए ये महामारी एक कठिन समय लेके आया है, मानवीय मूल्यों को समझकर और उदार होकर हम इस कठिन समय से निकलेंगे जरुर !

(Sujit Kumar )

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज