An Autumn Dreams – In Night & Pen With #SK

कल की दबी बिसरी झुंझलाहट;
सुबह भी जारी थी
सीढ़ियों से उतरते,
घुमावदार बोझ सी लगती,
ये चडाव और उतार सीढ़ियों की !झुंझलाहट उतार भी दे किसपर; उसपर जो अनसुना था मेरे बातों से !
शाम सड़क पर जैसे साल का अंतिम पड़ाव, उसके बचे कुछ महीने !मौसम भी जैसे यादों का एक कोना छुपाये, कैसे अनजान गलियों में सर्दियों के ठीक पहले,
थोरे ठण्ड के बीच ! अनजान से चेहरों में कौतुहल के साथ गुजरता, जैसे मन को बता रहा !

आगे २-३ गली के बाद मंदिर और फिर किराये का वो मकान !
और वही सीढियाँ  …

बीते साल ने कई किस्से .. कई यादें उड़ेले !
हवाओं में फिर वही महसूस हुआ थोरी सी सिहरन शाम की ..
कदम रुकते रुकते बढ़ चला मन पीछे मुड, नजाने किन रिश्तों की बाट जोह रहा था !

Night & Pen : SK

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज