फेरीवाले की आवाज .. लॉक – अनलॉक जिंदगी !

गली में आवाजें लगाता वो,
माथे पर बड़ी सी टोकड़ी जैसे,
सामानों का जखीरा उठा रखा हो ।

उसकी आवाज़ें कौतूहल से भरी,
विवश करती खिड़की से झाँकने को,
बच्चे भी ठिठोली करते पुनरावृति में ।

उम्मीद से भरी वो आवाज की कोई आये,
आजकल कोई आता नहीं निकल कर,
न उसको घेरकर बैठती मोहल्ले की औरतें,
न होती झिकझिक मोलजोल सामानों की ।

कोई जहरीली सी चीज है फैली फ़िज़ा में,
कुछ महीनों से लोग घरों से निकलते नहीं,
बस नहीं मानती है भूख और जिम्मेदारियां,
उम्मीद से हर नई गली को चीरती है,
फेरीवाले की आवाज ……. उम्मीद से भरी !

– सुजीत कुमार

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज