Random Thoughts Thoughts

4th Floor Thoughts !

The Age of Orthodox thinking…But where we stand; Our Country lost the credentials of New Facet of Innovation. Are we facing the Mind Drain or Influenced with Amplification of Physical Amenities and Glitz of Modernisation?
“On 4th Floor in Front of PC; the thoughts which create anxiety in mind, Questioning with our soul.
Our doing is worth doing, what innovation we emerged for our country or People?
India fall short of Scientific Research.. Our P.M Said
“ Expressing concern that countries like China had overtaken India in terms of position in the world of science, he said there need to do much more to change the face of Indian science “
Even We never think about these things..
We want to live a secure, saturated, Life..
“A office at 4th Floor with comfort chair, Iphone in hand, Sports Bike for Weekends Ride ..!
India Where Engineers Works In Bank and MBA’s Work in IT Company!
We need to think about – “We born with difference faces, so God wants us to be different and work different!! “
We Need to come over bureaucracy and political interference..
“Give Wings To Dreams, Fly High and Make Their Own Mark” – Dr. A. P. J. Abdul Kalam
From Sports to Tech industry, Why we are facing creative blocks ? … we need to opt out  from it !
ये सिडनी के मैदान में धुल चाटने की हो या, इंग्लैंड में लार्ड्स में घुटने टेके दासता !
कहीं ना कहीं हमारी सोच का प्रवाह ही अवरुद्ध हो रहा !
शायद हम स्वयं की सरकार की बहुमत जुटाने में कहीं आगे जाते जा रहे !
अपना घर, अपना गाड़ी, अपना ऑफिस ..समाज से कटाव भी इसका एक अंश है !
क्योँ देश की संप्रभुता, रक्षा जैसे मुद्दे पर, बातें जगजाहिर हो रही,
विषय भ्रष्टाचार या नैतिक पतन का नहीं, शायद सोचे तो ये कटु सत्य हमारी आत्मनिर्भरता की है,
आज भी विदेशी कंपनी के कारार हावी है हमारी अर्थव्यस्था पर !
देश तो वही है, आर्यभट्ट थे जहाँ, विवेकानंद थे जहाँ !
हम ही अपनी संपूर्णता से कोसो दूर जा रहे !
अपने पहचान को खोते जा रहे ..??
[– देख इस भीड को, सुन इस शोर को,
स्वप्न दिवा हो या निशा पहर का,
जीत की बाजी तो लगानी ही होगी,
लक्ष्य पाने के खातिर …..
कुछ तो सांसे गवांनी ही होगी ! –]
सुजीत भारद्वाज

 

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/