Yearly Archives: 2015

New Year

2016 – नये वर्ष का सफरनामा ….

ये जिंदगी का सफर है जो उम्मीदों से भरा ; सफर में पड़ाव है, सफर में मिलने वाले साथी है, कुछ छूटने वाले साथी है, उनकी यादें है लेकिन सफरनामा कब रुकता है ! गुजरे हुए मुकाम नहीं आते लौट के लेकिन हमेशा यादों की एक सौगात है जो साथ रहता ! ऐसे ही साल दर साल जिंदगी का सफरनामा अपने नए उम्मीदों के साथ बढ़ता हुआ ! कुछ निर्णय है, कुछ नसीहतें, कुछ सीख है तो कुछ अनुभव ! रिश्तें प्यार हँसी ख़ुशी गम चिंता सब का मिश्रित रंग बिना उढ़ेले जिंदगी की सही तस्वीर कभी बनती किया !

शब्दों का सिलसिला यूँ ही अनवरत चलता रहेगा, अपने आप को नए ऊर्जा से भरे, चुनौतियों को स्वीकारें और आगे बढ़ते रहे ! नव वर्ष की शुभकामनाएँ !!

“” बीता जो वक़्त वो यादों का मौसम था,
जाने इस बरस की क्या क्या सौगात है ! “”

New Year

#SK ~ Happy New Year 2016 🎆 🎋

विथ न्यू होप 🙂

happy birthday inbox love

हैप्पी बर्थडे – इनबॉक्स लव ~ 14

happy birthday inbox loveतुमने ही शुरू किया था ये सब !
तुम्हारा वो जीटॉक स्टेटस ..
“हैप्पी बर्थडे टू माय स्पेशल फ्रेंड 🙂 :D”
दो तीन स्माइली के साथ खूबसूरत सा वो मैसेज !

उस दिन तुमने स्पेशल बना दिया था , पुरे दिन तुमने अपने चैट स्टेटस में यही तो लिख रखा था !
मेरे लिये तो यही था बर्थडे गिफ्ट ;
अब मेरी बारी थी ; पर मैं स्पेशल कैसे लिखता इनविजिबल चैट में स्टेटस कहाँ होता ! पर मैंने कुछ भेजा था तुम्हें ~ 12.01 सुबह सुबह “बार बार ये दिन आये …. हैप्पी बर्थडे टू यू ” और सरप्राइज गिफ्ट भी तो ! उसके बाद फिर ये त्यौहार था हर वर्ष कुछ नया कुछ अलग, कुछ मैसेज, कुछ इनबॉक्स में तस्वीरें … कभी नहीं भूलता ये तारीख !

पर तुम भूल गये थे ; एक बार तो झगड़ भी लिया था,
आज तुम्हारे स्पेशल फ्रेंड का बर्थडे है तुम कुछ कहोगे नहीं … अगले दिन तक इनबॉक्स में ख़ामोशी पसरी रही ! फिर एकपल “हैप्पी बर्थडे टू माय स्पेशल फ्रेंड” !
ख़ुशी भी नहीं हुई , स्माइली भी तो लगाना भूल गए थे तुम !
फिर न मैंने याद दिलाया और तुमने भी कोशिश नहीं की !

पर तुम्हारे इनबॉक्स में बार बार ये दिन आये ;
और ” हैप्पी बर्थडे 🙂 ” ये हमेशा की तरह तुम्हें हँसाने के लिये हर साल मैं भेजता रहा ।।

मन ही मन सोचने लगा …
काश हम स्पेशल न होते ….. सिंपल में क्या हर्ज़ था !!

#SK in Inbox Love …  💌 🌾

Atal Bihari Vajpayee

अटल बिहारी वाजपेयी – राजनीति की आपाधापी से दूर …

अटल जी का व्यक्तित्व प्रखर रहा है ; जब वो सक्रिय राजनीति में थे उनको राजनैतिक सभाओं में सुनने का अवसर मिला था ; शांत चित्त संवेदनशील, बेबाक वक्ता, एक कवि ! उनकों सुनना हमेशा से प्रेरणादायक रहा ! राजनीति में अनुशासन और गरिमामय आचरण के वो हमेशा प्रतीक रहे हैं !

उनके संवेदना के स्वर से एक कविता

ज़िंदगी के शोर,
राजनीति की आपाधापी,
रिश्ते-नातों की गलियों और
क्या खोया क्या पाया के बाज़ारों से आगे,
सोच के रास्ते पर कहीं एक ऐसा नुक्कड़ आता है, जहाँ पहुँच कर इन्सान एकाकी हो जाता है…
… और तब जाग उठता है कवि | फिर शब्दों के रंगों से जीवन की अनोखी तस्वीरें बनती हैं…
कविताएँ और गीत सपनों की तरह आते हैं और कागज़ पर हमेंशा के लिए अपने घर बना लेते हैं |
अटलजी की ये कविताएँ ऐसे ही पल, ऐसी ही क्षणों में लिखी गयी हैं, जब सुनने वाले और सुनाने वाले में, “तुम” और “मैं” की दीवारें टूट जाती हैं,
दुनिया की सारी धड़कनें सिमट कर एक दिल में आ जाती हैं,
और कवि के शब्द, दुनिया के हर संवेदनशील इन्सान के शब्द बन जाते हैं !

Samvedna : Atal Bihari Vajpayee

क्या खोया क्या पाया जग में, मिलते और बिछड़ते मग में
मुझे किसी से नहीं शिकायत, यद्यपि छला गया पग पग में
एक दृष्टि बीती पर डाले यादों की पोटली टटोलें
अपने ही मन से कुछ बोले-अपने ही मन से कुछ बोले

पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी, जीवन एक अनंत कहानी
पर तन की अपनी सीमाएं, यद्यपि सौ सर्दों की वाणी
इतना काफी है अंतिम दस्तक पर खुद दरवाज़ा खोलें…अपने ही मन से कुछ बोले

जन्म मरण का अविरत फेरा, जीवन बंजारों का डेरा
आज यहाँ कल वहाँ कूच है, कौन जानता किधर सवेरा
अँधियारा आकाश असीमित प्राणों के पंखों को खोले…अपने ही मन से कुछ बोले

क्या खोया क्या पाया जग में, मिलते और बिछड़ते मग में
मुझे किसी से नहीं शिकायत, यद्यपि छला गया पग पग में
एक दृष्टि बीती पर डाले यादों की पोटली टटोलें
अपने ही मन से कुछ बोले-अपने ही मन से कुछ बोले !

उनके दीर्घायु की कामना के साथ जन्मदिन मुबारक अटल जी को !

#Sk

naughty childhood poem

अब तेरी शैतानियाँ बढ़ गयी है …

घर में कोई छोटा जब शैतानियाँ करता बचपन याद आ जाता, एक कविता इसी बचपन और उसके कौतुहल के इर्द गिर्द !!

naughty childhood poemअब तेरी शैतानियाँ बढ़ गयी है ;
लिपटना झपटना सब सीख़ लिया ;
घुटनों पर चल सब कोने तुमने देख लिए घर के ;
फर्श के सारे समान अब ऊपर सरका दिए है हमने ।

टीवी का रिमोट अब साबुत नहीं बचा ,
कुरेद दिया छोटे दो दांतों से कई सारे बटन ,
जो हैं उनकी लिखवाटें मिट गयी वो पढ़ने में नहीं आते ।
अब तेरी शैतानियाँ बढ़ गयी है !

थाली देखते ही तू भाग के आता ;
सबकुछ तुम्हें चख के है देखना ;
टच स्क्रीन मोबाइल पर आ गयी है खरोंचे ;
तुम्हारे छोटे नाखूनों ने खुरच दिया इसे,
अब तेरी शैतानियाँ बढ़ गयी है !

सारे के सारे खिलौने बिखरे पड़े,
कोई साबुत भी तो नहीं बचा,
किसी के हाथ, कार का चक्का,
भालू की टोपी, बंदर की पूंछ,
वो ट्रेन भी तो रुक रुक के चलता,
अब तेरी शैतानियाँ बढ़ गयी है !

बेमेल इकहरे शब्दों से भर जाता कमरा,
तुम्हें सिखाने में सब बन जाते बच्चे,
कितनी जल्दी वक़्त बीतता,
दिन की पकड़ा-पकड़ी,
और शाम माँ की लोरी,
अब जो तेरी शैतानियाँ बढ़ गयी है !

#SK

inbox love in December

Love in December – इनबॉक्स लव ~13

inbox love in Decemberदिसम्बर, धुंध, सिमटी रातें …
दिसम्बर की कुछ यादें !
जल्दी जल्दी शाम का ढल जाना ; हाँ हर बदलता मौसम यादों को भी तो बदल देता ; ये शीत में धुलती रातें, सुने से सड़कों पर धुंधली पड़ती रौशनी ! किसी साल से इसी मौसम की कुछ बातें याद है ? जैसे खुद से ही सवाल कर रहा वो और खुद ही जवाब भी सोच रहा ! किसी यादों में खो जाता वो, कुछ संवाद सा उसके अन्दर चल रहा जैसे …
— इनबॉक्स में —
अच्छा है बहुत ;
क्या अच्छा है ?
स्वेटर लाल रंग का जो फेसबुक पर पिक अपलोड की है !
अच्छा क्या ख़ास है ?
बस जैसे ये स्वेटर तुम्हारे लिए ही बना है ; लाल रंग के स्वेटर में लिपटी सादगी !
हम्म …
आगे कुछ जवाब नहीं मिला !
कुछ रुककर फिर वो कहता पोंड्स का एड कितना अच्छा है न रिश्तों की गर्माहट ; इस मौसम में याद दिलाती !
क्या याद दिलाती ?
जैसे बच्चे से मासूम चेहरे को हाथों से छूना !
हम्म … और कुछ तारीफ में शब्द है ?
शब्द तो प्रेरणा है जो इस सादगी से मिलती ; ये कभी खत्म नहीं होगी !
हर हमेशा कवि और कविता, कैसे सोच लेते इतना !
बस सोच लेता ; कैसे ये सोचा नहीं कभी . .
ओके ओके – आज के लिए इतना ही ;

बीच में रोका उसने – सुनो एक बात थी !

ठण्ड बढ़ रही दिसम्बर में ; वो लाल स्वेटर और लाल स्कार्फ बांध के जाना ! सॉरी लाल टोपी 😛

सो फनी 🙂 स्माइली के साथ !!

जैसे किसी ख्वाब से उठा हो वो ; रात बीतने को आ रही थी ; खाली चैट विंडो ; वही दिसम्बर की रात फिर … नींद की आगोश ! लम्बी सांस लेके बोलता “नाउ इट फील्स लाइक दिसम्बर; अनफोरगेटेबल दिसम्बर” !!

#SK in Inbox Love … With Essence of Winter 🍂🍂

Birds - Ignorance emotional poem

उपेक्षा ….

स्नेह, उपेक्षा, मायूसी, विक्षोभ के इर्द-गिर्द घुमती एक कविता !!!

Birds - Ignorance emotional poemउपेक्षा

कल्पित चित्र था सुबह का ,
दो पंछी रोज आते थे ,
बरामदे पर आके चहलकदमी करते,
तेरी आवाज से वाकिफ थे दोनों,
वहीँ गमले के इर्द गिर्द खेला करते,
कुछ दाने तेरे हाथों से लेके,
उड़ जाते थे खुले आसमां में !

आज बंद खिड़कियों पर,
ताक झाँक करती रही इधर उधर,
चोंचो को गुस्से से पटका चौखटों पर,
देखा भी नहीं ; कल के कुछ दाने बिखरे थे,
वो तेरी हाथों का मिठास जानते थे,
प्रतीक्षा के कई दिवस यूँ ही बिताये,
तुमने आवाज न दी फिर,
वो मायूसी से उड़े आसमां में !

किसी गली में बेजान गिरे मिले,
उपेक्षित निष्प्राण स्नेह से वंचित !
तेरी ख़ामोशी ने उनका गला घोंटा था !

#Sujit

away goodbye inbox love

बहुत दूर चला …. इनबॉक्स लव -12

away goodbye inbox loveअब बहुत ही दूर चला गया । हाँ इस इंटरनेट के अनंत संसार से परे ; पता नहीं कितनी दूर हाँ जहाँ से कोई संवाद नहीं होगा , कोई खबर नहीं होगी तुम्हारी । होंगे जिंदगी के अपने अपने उत्सव ;अपनी अपनी मायूसी में खोये रहेंगें, क्यों कहेंगे तुमसे ? होंगी उलझने भी बस अब तुझसे नहीं कहूँगा !

कितनी दूर चले गए ; ये फेसबुक और जीटॉक ही तो हमें मिलाता था । कब मिलते थे ; लेकिन मिलने से कहीं ज्यादा मिले थे ; इस दुनिया से भी परे चले जाओगे ? एक दिन तो ऐसा ही होगा ; हाँ अजनबी बन के बेखबर से रह जायेंगें कौन कब कहाँ चला जायेगा !

हाँ ये अब नहीं मिला सकता हमें ; इंटरनेट की तरंगे शिथिल हो गयी जब पास आके हम नहीं मिले ! आस पास के शहर में होने का सुकून था । दोनों एक तरफ के चाँद को देखते थे एक ही जगह बिल्डिंग के पीछे ; एक ही तरह का सुबह बालकनी के सामने निकलता सूरज ।मेरे संवाद तब तो सुबह और शाम के समय की पाबंद थी,  तुम्हारे इनबॉक्स में रोज  आ धमकने की आदत । हाँ तो अब ? …. अब अलग अलग शहर ! अजनबी बनाता है ये शहर भी, वो शहर कुछ पास होने का सुकून देता था लगता था जैसे किसी गली में कोई चेहरा तुमसा दिख जायेगा । कभी हम मिल पायेंगे ।

पर दूर आके अब उम्मीद है कभी नहीं मिलेंगे । खो जायेंगे अपनी गली में ; किसी चेहरे में तेरे होने की उम्मीद भी नहीं होगी ।

सच में भूल भी जाओगे ? क्या कभी याद करोगे ?

कुछ सवालों को अनुत्तरित रह जाना चाहिये …

इंटरनेट नहीं रेडिओ की तरंगे है मेरे आस पास अब ; संगीत है “तेरी दुनिया से होके मजबूर चला ; मैं बहुत दूर चला । “

#SK in Inbox Love …

Festival Season Poem

लौट आये त्यौहार वाले ..

त्यौहार में अपनों का आना, फिर उनका वापस लौट जाना ; अधिकांश राज्यों के लोग महानगरों में कार्यरत है, कुछ शब्द जो इस त्यौहार में उनके आने और वापस जाने पर सबके मन में कभी न कभी आता ! 

Festival Season Poemअब बस दीवालों पर अकेली झालरें झूल रही है,
छोटे शहर से बड़े शहर लौट आये त्यौहार वाले !

ये दो चार दिनों का मेला भी खूब सजता है,
पुरे साल अकेला करने का हुनर है ये पाले !

घर की कुछ यादों को डब्बे में बंद करके,
सात समंदर तक ले जाते है प्यार करने वाले !

कुछ दिन और रहते कह चुप सी हो जाती माँ,
कोई तरकीब नहीं जान पड़ती रोकने वाले !

ख़ुशी और मायूसी के बीच में कुछ रह जाता,
फिर एक दिन लौटेंगे ऐसे जीवन है उम्मीदों वाले !

#Sujit Kr. 

 

 

Life & Thoughts

अंतर्द्वंद – Night & Pen

Life & Thoughtsविचारों का जहाँ ठहराव हो जाता ; वहीँ से एक उदगम भी तो है एक नए विचार का ही ! कोई खामोश रहता है, जिक्र नहीं करता, शायद समझा नहीं पाये या समझने वाला आस पास नहीं, खीज कर दो बातों में वो बयान नहीं कर सकता, उसने शब्दों के समंदर को छुपा रखा है अपने अंदर, कोई समंदर सा ही समझ सकता, पर समंदर कौन है यहाँ ? कहाँ है ? सबने तो घेर लिया है खुद को बंद तालाब सा !

अनेकों राहों में जो आसान था, या जो सहज था सबने चुन लिया ; अँधेरे को कोई क्यों टटोले, उस कीचड़ से भरे रास्तों में फंस फंस कर चलना क्यों पसंद करे ! पर उसने चुन लिया वहीँ से गुजरना, कोई कुछ भी कहे ! सबकी बात नहीं मानना ही तो आजादी है ! आजादी वक़्त से, आजादी एक सा नहीं होने से, आजादी भीड़ में नहीं जाने की ! अलग थलग होना ही उसके आजादी है ! इस आजादी का उसके पास ज्यादा प्रमाण नहीं है न ही कोई परिभाषा ही ; बस मायने है इस आजादी के तो उसका अपना सफर !

तुम समझ नहीं सकते उसे, तुम सब समझों ही नहीं, वो तुम्हारे सोच को नहीं बदल सकता, न ही वो अपने सोच को बदलेगा ! यहाँ एक विवाद है जिसे वो न छोड़ेगा न छेड़ेगा इसे चलने दो दूर तक, तुम अपने बनाये सही रस्ते पर चले जाओ , वो निकलेगा तुम्हारे कहे गलत रास्तों पर उसी को सही करने को ! वो विरोध भी करेगा तो बस अपने आप में खो के चुप हो के ; तुम्हें उसके बीते वक़्त से कोई वास्ता ही नहीं न ही तुम उसके भविष्य का निर्धारण करोगे तुम उसे वर्तमान में कोस सकते, उसके वर्तमान को गलत कह सकते, पर वो नहीं सुनेगा न समझेगा ! उसने चुना है अपनी हार अपनी जीत, अपनी हार में वो किसी को शामिल नहीं करेगा उसकी अकेली हार ही उसकी जीत है क्योंकि उसने कदम तो उठाया कुछ करने को !

हाँ तेजी से बीतता वक़्त उसके लिए अवसाद सा है, क्योंकि वो कदम नहीं मिला पा रहा, वक़्त कदम से तेज हो तब भी आपाधापी थी, और कदम पीछे तो विषाद पीछे छूटने की ! वक़्त के इस बेमेल तालमेल में कहीं जीवन का कुछ छुपा है जो जीवन उसके लिए ऊपर सितारों के बीच गढ़ी गयी होगी !! पर उड़ान कब तक कैद की जा सकती, इसको तो आगे जाना ही है !!

Sujit in Night & Pen