wrecked life
Poetry

उजाड़…

wrecked lifeउजाड़ दिन ,
जैसे कुछ किताबें इधर उधर हो बिस्तर पर ,
कपड़े मुड़े सिमटे फेंकें हुए ,
क्या कहाँ किस ओर क्या पता ,
घण्टों खोजो तो न मिलता कोई सामान ,
ये थे उजाड़ घर के कुछ अस्त व्यस्त कमरे ।

अनबन, आधे अधूरे मन से बातें,
बेरुखी, तकरार और जिरह ही जिरह,
घण्टों का सन्नाटा कोई किसी को न समझे,
अगर मन से प्रेम खत्म हो जाये तो …
ऐसे ही उजाड़ हो जाता होगा जीवन ।

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/