wrecked life
Poetry

उजाड़…

उजाड़ दिन , जैसे कुछ किताबें इधर उधर हो बिस्तर पर , कपड़े मुड़े सिमटे फेंकें हुए , क्या कहाँ किस ओर क्या पता , घण्टों खोजो तो न मिलता कोई सामान , ये थे उजाड़ घर के कुछ अस्त व्यस्त कमरे । अनबन, आधे अधूरे मन से बातें, बेरुखी, तकरार और जिरह ही जिरह, […]