respectful relationships poem
Poetry

बेअदब अदब रिश्ते …

वो रिश्ते जो अबूझ थे अच्छे थे, ठूठ पेड़ की तरह, न कोई हलचल थी, न कोई हवाएँ और न ही बढ़ते वो किसी की तरफ, बिना पहचान के खड़े रहते आमने सामने, ख़ामोशी से एक अदब का रिश्ता निभाते ! ये हरियाली लताओं सा रिश्ता, लिपटते मिलते, फिर बढ़ जाते गले की ओर, घुटन […]

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अहसासों को कभी पूछना …

तुम अपने ताल्लुक के, अबूझ हिस्सों में मुझे कभी देखना, उस ओर भी एक दिलचस्प इंसान है, बिलकुल तुम्हारी उम्मीदों की तरह का ! उम्मीदों के पहाड़ सा ढक दिया तुमने, जज्बातों को घुटन की आदत सी हो जाएगी, कभी खुले खुले में ला के देखना, ये जज्बात बड़े खूबसूरत से होते है ! अहसासों […]