Inbox Love

Will You Be My Friend Again ? – Inbox Love 4

Inbox Love
विल यु बी माय फ्रेंड अगेन ?
क्या फिर से तुम मेरे दोस्त बनोगे ??
दोस्त तो हम है ही,
नहीं फिर से वैसे ही जैसे हम थे लेकिन जैसे हम अभी नहीं है ।
फिर से उसी तरह सुबह को रोज नए ढंग से जगाते हुए  हर शाम की तेरी उदासी को बहलाते हुए ;
हर रात को थपकियों से सुलाते हुए ।
फिर वैसे ही सब …
कुछ अनमने अटपटे से बातों की ख़ामोशी मन में उमड़ते रहे ; उसके भी मेरे भी ।
फिर हाँ ठीक है – यस आई विल !
धीमे धीमे से कहना रोक नहीं पाया
” बन पाओगे .. फिर वैसे ही .. शायद नहीं “
ऐसा क्यों कहा ?
पता नहीं बस ऐसे !
मन ही मन गुनगुनाने का मन करने लगा “आँख से दूर ना हो दिल से उतर जायेगा ” ।।

Inbox Love Bring By – Sujit

Read –  Love in Inbox Part – 1   Love in Inbox Part – 2  Love in Inbox Part – 3

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

5 thoughts on “Will You Be My Friend Again ? – Inbox Love 4

    yogi saraswat

    (February 21, 2015 - 3:56 am)

    भावनाओं क हिचकोले हैं आपकी पोस्ट में

    Sujit Kumar Lucky

    (February 22, 2015 - 11:37 am)

    shukriya !!

    manoj sahu

    (March 11, 2015 - 8:26 am)

    very nice , true from the heart. poets capture the basic essence of human emotion

    Sujit Kumar Lucky

    (March 11, 2015 - 4:23 pm)

    thanks …

    Sujit Kumar Lucky

    (May 19, 2015 - 5:25 pm)

    Thanks for appreciation 🙂

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