inbox love
Poetry

Love in Inbox – #इनबॉक्स_लव – 3

कुछ नहीं..
क्या कुछ नहीं ?
नहीं नहीं फिर भी ??
एक ख़ामोशी के संवाद के लौटने तक ;
स्तब्ध सन्नाटा जैसे शब्द बंधन तोड़ निकलना चाह रहे ,
पर निकल ना सके ;
पसरी ख़ामोशी को तोड़ते हुए ;
बनावटी से शब्दों से ;
बस ऐसे ही .. “कुछ नहीं ” !!

inbox-love

और तब ..
क्या और ?
हाँ क्या ?
तो फिर !
संवाद के आगे क्या ;
नजाने क्या ; पता नहीं लेकिन ,
और तब एक गुजारिश है शायद ;
शब्दों का सिलसिला रुके नहीं ;
थमे नहीं ; रुके नहीं ये कारवां ;
कुछ कहते रहो ;
कुछ भी नहीं है कहने को ;
फिर और तब ..
से आगे की कुछ बात !!

Inbox Love Bring By – Sujit

Read –  Love in Inbox Part – 1 

Read –  Love in Inbox Part – 2

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/