vartalaap hindi poem
Poetry

वार्तालाप ….

वार्तालाप बस दिनचर्या की तरह, जैसे अधूरी ख्वाहिशों की सेज हो, कोई समझौते की बंदिश है इसपर, या शब्दविहीन तल्खी हो कोई अंदर ! रोज खिड़की से दिखती सुबह, और झुरमुटों में डूब जाती शाम, बिना कुछ बातों के कैद सी है अनकहे बातों की लम्बी दास्तान ! वार्तालाप विहीन बीतते दिनों को, इंतजार है […]

argument hindi poem
Poetry

जरुरी था ….

तुम्हारा कहना और मेरा बस सुनते जाना जरुरी था मन के एक उबाल का शब्दों में समा जाना और फिर तर से गले से कुछ न कह पाना दोनों तरफ फैले शोर का दब जाना और ओढ़ लेना लम्बी ख़ामोशी जरुरी था विवादों प्रतिकारों से उपजे संवादों को भूल जाना, किसी उम्मीदों की सुबह में […]