vacant way of life
Poetry

निर्वात पथ पर ….

vacant way of lifeनिर्वात पथ पर अब संवाद नहीं ;
व्यर्थ वक़्त का तिरस्कार नहीं !

शून्य सफर पर अब श्रृंगार ही क्या ?
विचलित पथ का उपहास ही क्या ?

मौन पड़े इस प्राँगण में ;
कुछ खींचनी फिर रंगोली है !

शाम होती गोधूलि पर ;
रात फिर नई नवेली है !

मंजिल की तैयारी पर ;
पीछे छूटी हवेली है !

हर संशय का है सार यही ;
अगर चलता है तो हार नहीं !

#Sujit

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

2 thoughts on “निर्वात पथ पर ….”

  1. बहुत बढ़िया ! आपकी नयी रचना बहुत अच्छी लगी, आखिर के दो लाइन महत्वपूर्ण लगी http://www.gyanipandit.com की और से शुभकामनाये !
    थैंक्स

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