vacant way of life

निर्वात पथ पर ….

vacant way of lifeनिर्वात पथ पर अब संवाद नहीं ;
व्यर्थ वक़्त का तिरस्कार नहीं !

शून्य सफर पर अब श्रृंगार ही क्या ?
विचलित पथ का उपहास ही क्या ?

मौन पड़े इस प्राँगण में ;
कुछ खींचनी फिर रंगोली है !

शाम होती गोधूलि पर ;
रात फिर नई नवेली है !

मंजिल की तैयारी पर ;
पीछे छूटी हवेली है !

हर संशय का है सार यही ;
अगर चलता है तो हार नहीं !

#Sujit

2 thoughts on “निर्वात पथ पर ….

  1. gyanipandit

    बहुत बढ़िया ! आपकी नयी रचना बहुत अच्छी लगी, आखिर के दो लाइन महत्वपूर्ण लगी http://www.gyanipandit.com की और से शुभकामनाये !
    थैंक्स

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