Hindi Poem on Summer Days

झुरमुटों में कैद दिन

Hindi Poem on Summer Daysपेड़ों की झुरमुटों में कैद दिन
और इस दिन की गिरफ्त में जिंदगी
कितनी तपिश है पत्तों पर
आग सी आभा जो जलाने को आतुर
कुम्हला के भी मुस्कुराती ये पत्तियाँ
कुंद पड़ गयी हरियाली इनकी
झुलसी झुलसी सी टहनियाँ,
उष्ण पहर विकट पल है इन पर !

पर लौटेगी जब शाम
नाचेंगी सब हवाओं में,
डालों के संग गायेगी,
इस ताप जीवन पर
मधुर गीत जीवन के !

This poem depicted life of tree’s and leaves in Summer, How they survive in this adverse hot condition, We should get motivation from these trees as they celebrate summer evening in lively manner even after a warmth day. 

#SK

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज