Hindi Poem on Summer Days
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झुरमुटों में कैद दिन

पेड़ों की झुरमुटों में कैद दिन और इस दिन की गिरफ्त में जिंदगी कितनी तपिश है पत्तों पर आग सी आभा जो जलाने को आतुर कुम्हला के भी मुस्कुराती ये पत्तियाँ कुंद पड़ गयी हरियाली इनकी झुलसी झुलसी सी टहनियाँ, उष्ण पहर विकट पल है इन पर ! पर लौटेगी जब शाम नाचेंगी सब हवाओं […]

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A Sunday of Summer

अम्बर की ये तीखी किरणे,धरा लगी ऊष्मा को सहने,नदियाँ लगी उथले हो बहने ! शुष्क जमीं सब सूखा झरना,लगा पतझर में पत्तों का गिरना ! सड़क सुनी, गलियाँ भी खाली,इतवारी दिन लगती है सवाली ! धुल हवा के भरे थपेरे,मन बेचैन जैसे हुए सवेरे ! तब लंबी छुट्टी गाँव बुलाती,याद बचपन की ऐसे वो आती […]

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बरसों सावन – Waiting For Rain

कैसे सावन आये तुम बिन गहने !छितिज धरा सब धुल उराये,नभ के बदल बन गये पराये, उमड़ घुमड़ तुम आते ऐसे !कसक मन की भी जाती जैसे,जग चर की तुम तृष्णा मिटाते,सूखे नयनों में आके नीर गिराते, पर आये सावन बिन तुम गहने !कोई जैसे चुप चुप से लगे रहने ..!बेकल मन, सुने सपने …बरसों […]

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वैसाखी दुपहरी !

पतझरों से उजरे उजरे दिन लगते , दुपहरी है अब लगती विकल सी ! वैसाख के इस रूखे दिन तले, कभी बचपन में सोचा करते थे ! और चुपके आहिस्ता से देखते थे, माँ की आंखे कब झपके थोरी नींद में ! हम भाग चले सखा संग किसी नदिया की ओर ! अबकी वैसाखी दुपहरी […]