rain and memories
Poetry

बारिश .. सूनी सूनी !

rain and memoriesबारिश, रात और भींगे मुंडेरों से टपकती है बूंदें ही नहीं ,
अनेकों पुरानी यादें भी रिसती रहती है कोनों कोनों से !

वो पुरानी खिड़की जिसके फांकों से एक धार,
चुपके से सिरहाने के कोनों पर आ ठहरती थी !

एक पर्दा का सिरा हवाओं संग बह के लटक गया था बाहर,
उसके लरियों से गिर कर बूंदें फर्श पर सर्पीली सी बहती थी !

चायों की कई खाली प्यालियाँ टेबल पर परी थी,
घंटों बातों में वक़्त को बिताना इस मौसम ने सिखाया था !

अब बेमौसम ही सब आते कई कमरें बंद ही रह जाते है,
बारिशों में किसी ने खोल के वहाँ ठहाके नहीं लगाये !

सूना परा है सब ऊपरी मंजिल के कमरों में ताले है परे कब से,
वो बारिश में कैरम के खेल की नोकझोंक जो नहीं होती अब वहाँ !

#Sujit .. Poetry of Rain !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

2 thoughts on “बारिश .. सूनी सूनी !

Comments are closed.