evening & sunset poetry
Poetry

शाम की व्याख्या …..

एक मित्र ने शाम की एक तस्वीर पर कुछ लिखने को कहा, कवि अनेकों नजरिये से परिभाषित कर सकता किसी चीज को, तो शाम की व्याख्या कुछ इस तरह …

evening & sunset poetry

१. (कुछ शायरी के लहजे में )

एक मुक्कमल शाम की तलाश में,
कितने बार डूबा है ये सूरज !

२. (प्रेम और विरह के बीच शाम)

मुंडेरों पर रोज शाम को ढलते देखता,
तेरे जाने का  अहसास रोज ढलता है इस शाम के साथ !

३. (शाम जिंदादिल जिन्दगी के नाम )

एक शाम का सब्र तो रखो ;
जिन्दगी के गम भी तो डूब ही जाते है !

४. (शाम रोजमर्रा के तरह )

रोज एक एक बोझ उतरता है कंधे से जिन्दगी,
मैं ढलते शाम की तरह तेरी किस्तें अदा करता हूँ !!

५. ( प्रकृति सौन्दर्य के नजरिये से )

धरती को सूरज छूने चली है,
ये शाम देखो किससे मिलने चली है !

#Sujit

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/