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मैं ये सोच कर ये उसके दर से उठा था .. (भूले बिसरे गीत)

“हकीकत” फिल्म से भूले बिसरे गीत में रफ़ी साहब ..

मैं ये सोच कर ये उसके दर से उठा था ;
की वो रोक लेगी मना लेगी मुझको ;
हवाओं में लहराता आता था दामन ;
की दामन पकड़ कर बिठा लेगी मुझको ;
कदम ऐसे अंदाज से उठ रहे थे की ;
आवाज देकर बुला लेगी मुझको ;
मगर उसने रोका ना, ना उसने मनाया ;
ना दामन ही पकड़ा ना मुझको बिठाया ;
ना आवाज ही दी ना वापस बुलाया ;
मैं आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता ही आया ;
यहाँ तक की उससे जुदा हो गया मैं !!

“Main Yeh Soch Kar Uske Dar Se” – The greatest ever Song / Ghazal from movie Haqeeqat in 1964. The trio of Madan Mohan, Kaifi Azmi, Mohd.Rafi has given the most beautiful Ghazal of all the time. A Evergreen Gem by Md. Rafi

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
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