Poetry

सरहदें – Wound of Kashmir

kashmir-poemदो अपनों ने मिल के उड़ाया था,
कभी उस सफ़ेद कबूतर को ।

दो अपनों के घरों के बीच ;
उसे सरहदों का क्या पता था ।

खुली आसमानों और हवायें
दोनों तरफ तो एक सी थी ।

एक दिन उसकी परों को काट दिया किसी ने ;
कुछ लहू की बुँदे झेलम में घिरी ;
यूँ ही बहती नदी में वो बह गयी ;
कुछ बुँदे ट्यूलिप के खेत में गिरी थी ;
लाल फूलों में वो भी यूँ ही खो गयी ।

झीलों ने ओढ़ ली है चुप्पी ;
शिकारे ठहर सी गयी किनारों पर ;
गरजती बंदूकों के सायों ने;
लील ली है जन्नत की हर हँसी;
सुना कल रात जल उठा था आसमां !

झंडों में लिपट कर आ गयी कई लाशें ;
आखिर …
सबने लौटकर वापस आने का वादा किया था !

चेहरों और जिस्म पर जख्म तो कई थे ;
दिल में जो दर्द था वो यूँ ही परा रह गया ;
कब तक? एक सवाल और फिर गहरा हो गया !

#SK – ये कविता कश्मीर के शहीद वीर जवानों को समर्पित !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
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