अहसासों को कभी पूछना …

laugh-1966858_640तुम अपने ताल्लुक के,
अबूझ हिस्सों में मुझे कभी देखना,
उस ओर भी एक दिलचस्प इंसान है,
बिलकुल तुम्हारी उम्मीदों की तरह का !

उम्मीदों के पहाड़ सा ढक दिया तुमने,
जज्बातों को घुटन की आदत सी हो जाएगी,
कभी खुले खुले में ला के देखना,
ये जज्बात बड़े खूबसूरत से होते है !

अहसासों को कोई ऐसी वजह न दो,
वो बिखर जाते तो फिर पनपते नहीं,
बस बंजर से दो दिलों को ताउम्र धड़काते रहते,
या जलाते रहते सीने में आग बनकर,
उन्हें तो छांव दो फूल बनके महक सके !

अहसासों को कभी पूछना,
वो कभी खामोश नहीं रहना चाहते,
बस कोई ऐसा सबब दो,
की वो हर पल मुस्कुरा सके !

#SK – Insane Poet

2 thoughts on “अहसासों को कभी पूछना …”

  1. प्यारी कविता आखिर की पंक्तिया बहुत ही दिलचस्प लगी.
    धन्यवाद्

  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति …. Nice article with awesome explanation ….. Thanks for sharing this!! 🙂 🙂

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