Poetry

अहसासों को कभी पूछना …

laugh-1966858_640तुम अपने ताल्लुक के,
अबूझ हिस्सों में मुझे कभी देखना,
उस ओर भी एक दिलचस्प इंसान है,
बिलकुल तुम्हारी उम्मीदों की तरह का !

उम्मीदों के पहाड़ सा ढक दिया तुमने,
जज्बातों को घुटन की आदत सी हो जाएगी,
कभी खुले खुले में ला के देखना,
ये जज्बात बड़े खूबसूरत से होते है !

अहसासों को कोई ऐसी वजह न दो,
वो बिखर जाते तो फिर पनपते नहीं,
बस बंजर से दो दिलों को ताउम्र धड़काते रहते,
या जलाते रहते सीने में आग बनकर,
उन्हें तो छांव दो फूल बनके महक सके !

अहसासों को कभी पूछना,
वो कभी खामोश नहीं रहना चाहते,
बस कोई ऐसा सबब दो,
की वो हर पल मुस्कुरा सके !

#SK – Insane Poet

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

2 thoughts on “अहसासों को कभी पूछना …”

  1. प्यारी कविता आखिर की पंक्तिया बहुत ही दिलचस्प लगी.
    धन्यवाद्

  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति …. Nice article with awesome explanation ….. Thanks for sharing this!! 🙂 🙂

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