Poetry

अहसासों को कभी पूछना …

तुम अपने ताल्लुक के, अबूझ हिस्सों में मुझे कभी देखना, उस ओर भी एक दिलचस्प इंसान है, बिलकुल तुम्हारी उम्मीदों की तरह का ! उम्मीदों के पहाड़ सा ढक दिया तुमने, जज्बातों को घुटन की आदत सी हो जाएगी, कभी खुले खुले में ला के देखना, ये जज्बात बड़े खूबसूरत से होते है ! अहसासों […]

Poetry

बैठे हो क्यों ख्वाब बन कर ?

खामोश ही सही, पर रहों आसपास बनकर ! बिखर जाओ भले, रह जाओ एक अहसास बनकर ! दूर जाने से किसे कौन रोके, ठहर जाओ बस कुछ याद बनकर ! रिश्तों की कुछ लकीर सी उलझी, उभर परी तो बस एक सवाल बन कर ! रोका हाथों से बहुत हमने, बह ही जाते जज्बात बनके […]