come back love
Poetry

तुम आओ लौट के …

come back loveतुम आओ लौट के,
देखो सिलवटें बिछावन की,
वैसी ही है अब भी ।

बिखरे बिखरे से पड़े है,
सारे सामान मेरे तुम्हारे ।

देखो हरतरफ हरजगह की,
सब चीजेँ मुँह ताकती सी ।

सुने परे सारे गलियारें,
कान लगाए है दीवारों पर,
पायलों की छन की ताक में ।

हर वो बिंदी वहीँ है अब भी,
याद है अलमारी के शीशों पर,
जो सटा रखे थे तुमने ।

तुम आओ लौट के,
उधरे उधरे से है जो रिश्ते,
उन्हें करीने से सजाने को ।

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/