Poetry

आओ फिर बच्चे बन जाये …..

ले फिर गुलाटीयाँ,
और फिर करतब करें ।

बंदर का खेल,
और भालू बन डराये ।

सीखे फिर ककहरा,
और बोले तोतली जबान ।

बाल को खींचें,
और मुँह चिढ़ाये ।

दूर से चंदा मामा को,
अपने संग बुलाये ।

जीवन की आपाधापी से अलग,
आओ फिर बच्चे बन जाये ।

#SK #DadsDiary 🤡🤠

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/