ravan dahan - vijyadashmi

रावण जो तेरे अंदर बैठा है …

ravan dahan - vijyadashmi कागज़ों के रावण ही जलेंगे अब,
एक रावण मन में भी तो बैठा है !

द्वेष नफरत खिली चेहरे पर,
त्योहारों पर पहरा बैठा है !

सीख भजन की दब गयी कहीं,
यहाँ गला फाड़ सब बैठा है !

एक राम विजय का पर्व मनाते;
अब कई राम पराजित बैठा है !

मानवता को तू भूल रहा ;
ये कैसा हठ तू ले बैठा है !

जला सको तो जला लो तुम भी,
रावण जो तेरे अंदर बैठा है !

#Sujit …

1 thought on “रावण जो तेरे अंदर बैठा है …”

  1. सच कहा आपने कागज के रावन को जलाने से बुराईया नहीं मिटेंगी उसके लिए हमें अपने अन्दर के रावन को मिटाना पड़ेंगा, धन्यवाद्

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