away goodbye inbox love
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बहुत दूर चला …. इनबॉक्स लव -12

away goodbye inbox loveअब बहुत ही दूर चला गया । हाँ इस इंटरनेट के अनंत संसार से परे ; पता नहीं कितनी दूर हाँ जहाँ से कोई संवाद नहीं होगा , कोई खबर नहीं होगी तुम्हारी । होंगे जिंदगी के अपने अपने उत्सव ;अपनी अपनी मायूसी में खोये रहेंगें, क्यों कहेंगे तुमसे ? होंगी उलझने भी बस अब तुझसे नहीं कहूँगा !

कितनी दूर चले गए ; ये फेसबुक और जीटॉक ही तो हमें मिलाता था । कब मिलते थे ; लेकिन मिलने से कहीं ज्यादा मिले थे ; इस दुनिया से भी परे चले जाओगे ? एक दिन तो ऐसा ही होगा ; हाँ अजनबी बन के बेखबर से रह जायेंगें कौन कब कहाँ चला जायेगा !

हाँ ये अब नहीं मिला सकता हमें ; इंटरनेट की तरंगे शिथिल हो गयी जब पास आके हम नहीं मिले ! आस पास के शहर में होने का सुकून था । दोनों एक तरफ के चाँद को देखते थे एक ही जगह बिल्डिंग के पीछे ; एक ही तरह का सुबह बालकनी के सामने निकलता सूरज ।मेरे संवाद तब तो सुबह और शाम के समय की पाबंद थी,  तुम्हारे इनबॉक्स में रोज  आ धमकने की आदत । हाँ तो अब ? …. अब अलग अलग शहर ! अजनबी बनाता है ये शहर भी, वो शहर कुछ पास होने का सुकून देता था लगता था जैसे किसी गली में कोई चेहरा तुमसा दिख जायेगा । कभी हम मिल पायेंगे ।

पर दूर आके अब उम्मीद है कभी नहीं मिलेंगे । खो जायेंगे अपनी गली में ; किसी चेहरे में तेरे होने की उम्मीद भी नहीं होगी ।

सच में भूल भी जाओगे ? क्या कभी याद करोगे ?

कुछ सवालों को अनुत्तरित रह जाना चाहिये …

इंटरनेट नहीं रेडिओ की तरंगे है मेरे आस पास अब ; संगीत है “तेरी दुनिया से होके मजबूर चला ; मैं बहुत दूर चला । “

#SK in Inbox Love …

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/