Festival Season Poem
Poetry

लौट आये त्यौहार वाले ..

त्यौहार में अपनों का आना, फिर उनका वापस लौट जाना ; अधिकांश राज्यों के लोग महानगरों में कार्यरत है, कुछ शब्द जो इस त्यौहार में उनके आने और वापस जाने पर सबके मन में कभी न कभी आता ! 

Festival Season Poemअब बस दीवालों पर अकेली झालरें झूल रही है,
छोटे शहर से बड़े शहर लौट आये त्यौहार वाले !

ये दो चार दिनों का मेला भी खूब सजता है,
पुरे साल अकेला करने का हुनर है ये पाले !

घर की कुछ यादों को डब्बे में बंद करके,
सात समंदर तक ले जाते है प्यार करने वाले !

कुछ दिन और रहते कह चुप सी हो जाती माँ,
कोई तरकीब नहीं जान पड़ती रोकने वाले !

ख़ुशी और मायूसी के बीच में कुछ रह जाता,
फिर एक दिन लौटेंगे ऐसे जीवन है उम्मीदों वाले !

#Sujit Kr. 

 

 

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/