काफ़िर …. !!

kaafir-sk

पता नहीं किस गुनाह की माफ़ी में
हर आते जाते रास्तों पर दो चार सिक्के बाँट आता ।

रिश्ता भी रखता हूँ दोस्ती का,
फिक्र भी और इबादत भी करता,
बेरुखी में दिल भी उतना दुखा ही जाता ।

पता नहीं किस उम्र की कसक रह गयी थी,
गुब्बारे तो ले लेता ..
किसी बच्चे के हाथों में दे के उड़ा जाता ।

बाँटता हमेशा सबको सब चीजें खुशियों की;
अपनी चीजों की जरुरत तुझसे छुपा जाता ।

होंगे कई ऐब मेरे सोचे गये तस्वीरों में,
मैं अपने उन सब रंगों को ही मिटा जाता ।

दर पर सजदा कर मांग लेता दुआ अपनी,
मालूम है खुदा तू देगा नहीं मुझे मेरी दुआ,
ये सोच काफ़िर बन खुद को फिर अपना जाता ।

#SK

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

3 thoughts on “काफ़िर …. !!

    काफ़िर – 2 …. !!

    (May 10, 2014 - 7:06 pm)

    वो काफिर मंदिर की सीढ़ियों तक ही रहता …..

    Alok

    (May 15, 2014 - 4:35 am)

    well written ….

    Sujit Kumar Lucky

    (May 15, 2014 - 6:33 pm)

    Thanks …

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