Poetry

काफ़िर – 2 …. !!

atheist-part-2

वो काफिर मंदिर की सीढ़ियों तक ही रहता,
नीचे वहीँ सोचता टटोलता खुद को तलाशता !

तृष्णा थी उसके पास नजाने कैसी ..
अनंत संवेदनाओं से भरी लिपटी !

हवायें धुल सी भरी उसकी ओर आती,
आँखें नहीं मूँदता वो देखता रहता एकटक,
तबतक जबतक कोरो से गीली आँसू ना निकले !

सुनता रहता रेगिस्तानों में उठते झंझावारों
के शोर को..
जैसे निर्जन हो चुके पेड़ों में कुछ नहीं रहा,
सुखी डालियाँ जिस पर पत्ते ही नहीं है गिराने को,
कँटीली झारियों सा निष्प्राण !

बेवक्त उसे लगता फिर सजदा कर ले,
अपने अभिशप्त शब्दों को ले,
वो काफिर मंदिर की सीढ़ियों तक ही रहता !!

#SK

Read – काफिर – I

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/