Monthly Archives: March 2014

किसी आँगन की खामोशी …….

Summer__s_gone_II_by_EvasionK

किसी आँगन की खामोशी को देखा है,
ना क़दमों की आहट है कोई,
ना पायलों की रुनझुन ही बजते,
ना किलकारी ही गूँजती अब,
ना कोई रूठता ना रोता है !!

ऐसे सुने से परे है हर कोने,
जैसे घने जंगलों में शब्द खो जाते,
ना भूलती है माँ वो …
हर शाम दहलीज पर राह देखती !

पंछी भी हर सुबह बंद खिरकियों से लौट जाती,
हर सुबह खुली मिलती थी जो,
गलियाँ बाट जोहती हरदम,
हँसता हुआ कोई आता था इनमे !

अब भी आँगन उसका अपना ही है,
क्या कोई राहगीर अपने सफर पर निकल गया है ?

In thoughts of silent courtyard .. somewhere !!!

#Sujit …

Image Source : http://www.deviantart.com/art/Summer-s-gone-II-139621419

Are We Working for Bettered version of ourselves?

Do what you think, do what you wish for, this time never come back to you. If you really care for your thoughts forget your fear of failure, every defeat comes with full of lessons.  Don’t judge me with my current words only; I am still an ordinary people who have lust for writing and sharing.

Living in High indulges Metro city looks fascinating in televisions and magazines but it really not. You need to chase everything here. Our Major obstacle of life is fear of something. Sometime Fear of Failure, sometime fear of losing someone, sometime fear to face the public crowd, fears of taking responsibilities, fear of losing our comfort zone… We all are surrounded with some fear. These fears degrade our innovation, we try to keep us in a subtle zone and this continuous nature of negotiation creates obstacles to go beyond them.

follow-mentors

Image Source: http://elitedaily.com

If you are reading this post…Don’t expect from me for a fairy tale of highly successful person who done miracles in life. It just a possession of life I am sharing with you. I never thought about known be an acclaimed as a person of some profound skill sets. Still I am wondering what life is and how to live it on fullest, this journey of life full of jerks, which diminishes my way. But I never give up!!

So let’s begin with some incidents…

#Story I: I don’t know how my words effects your living, I found you in enigma, your clash between dreams and exceptions. I felt your fear inside me,   it never be easy to make strong decisions about life, to resist all circumstances. But continuous effort of daily dying actually makes you alive everyday with new hopes of rays. Hope it will continue to spread and create an instance for everyone who gets interacted with your life.

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Image Source: www.businessfinancestore.com

#Story II: Mentorship itself a huge accountability, knowingly or unknowingly may be some of you get lessons from me, some time you admitted it some time you refused it, I accept all of you evenly. Sometime you blame me for my grey shades; I have no any explanations for it. But I want to transmit some of my renderings of life. I know one day you forget my attire, overlook my appearance. But I want be remembered with my words in your mind, which perpetually resides with you.

Before end this narration, cultivate a parallel universe inside you which defend you from all insecurities and helps you to discover yourself.

Yes I am insane nerd and still reinventing myself for a bettered version of myself.  :- Sujit 

छोरे जाते है खुद को तलाशने के लिये कुछ शब्दों के साथ ……..

लिबास बदल लेते है,
पुरानी जिंदगी ले फिर,
रोज फिर चल देते !

उम्र तमाम बिताया,
किस्मतों से शिकायतों में !

थोरे जल जाते तो,
पत्तों का ढेर खत्म होता !

चीखते रह गये भीड़ से निकलने को,
कभी चुप हो लेते तो जिंदगी से दो बात होती !!

कुछ कागजों के बीच – The Memory In My Old Wallet

VoicesFromThePast

पुराने बटुए में कुछ कागजों के बीच,
कुछ महफूज़ रखा है हमने यादों को !

अनेकों आधे अधूरे लम्हों को,
थोरा थोरा जिक्र करके रखा है हमने !

अनेकों छोटे छोटे कागजों के टुकड़े है,
मैं तलाश रहा वो उस दिन का खोया सा किस्सा,
भीड़ ज्यादा थी हर तरफ लोगों की रास्तों पर,
किसी तरह बचा के मैंने रखा तुम्हारें यादों को,
में ढूंड रहा वो आधा सा पन्ना !

उड़ेल रखा है मैंने सारे पुराने परे यादों को,
कुछ मुड़े पड़े कागजों पर गिरह सी लिपट गयी है,
डरता हूँ खोलते हुए बिखर जाएँगे वो,
कसक रह जाती है अंदर उन अधूरे नज्मों को,
कुछ इक नाम दे देते जो छुट गया है कब से,
शब्द देकर उन्हें हम पन्नों से बाहर ला पाते,

पुराने बटुए में कुछ कागजों के बीच,
जिन्हें थोरा थोरा जिक्र करके रखा है हमने !

दूर से ये रिश्ता …

distance-life

बहुत दूर से ये रिश्ता,
धुँधला धुँधला सा लगता,
कभी कभी आकर वो इसे,
इक नाम दे जातें है !

हाँ में रुकसत भी नहीं करता,
ना ही थामता हूँ आगे बढकर,
इक दफा उब कर दूरियों से,
हमने बंधनों की सिफारिश की थी !

क्या समझाया था उसने,
या समझ पाया था मैं जितना,
ये रिश्ता बातों के बिना जर्जर नहीं होता,
हाँ तल्ख हो जाती है कभी,
खामोशियों में लिपटकर ये,
पर दूर रहकर भी ये टूटा नहीं कभी !

कभी बनाया है चेहरा तुमने शब्दों से,
मैं हर सुबह समेटता रहता शब्दें,
रात तक उसे इक तस्वीर कर देता !

तुम देखोगे बचपन है कभी उसमें,
कभी आँगन और कुछ फूलों के गमले,
कभी कुछ पंछी भी पास है उनके,
सब मेरी शब्दों के तस्वीर से बनते,
और ऐसे ही बन भी जाती होगी वैसी सुबह !

क्या दूर होकर भी गिरते आँसुओं की,
सिसक सुनी जा सकती,
मेरे शब्द कंधा महसूस कराते है,
मेरे रोने पर !

उब भी जाता हूँ कभी लंबी खामोशियों से,
और झुँझलाता बच्चों की तरह,
कितने दफा लौट जाता मायूसी से,
जैसे खाली मेले से बिना खिलौना लिये,
लौटता वो बच्चा ..
कुछ महसूस हुई वो मायूसी बचपन की !

उस रात माँ फेर देती जो थोरा हाथ,
भूल जाता हर कसक कुछ खोने की,
ऐसी ही कुछ खामोशियाँ मिट जाती,
दूर होकर भी क्या बातें ऐसी होती है !

कुछ कोशिशें अधूरी कई बार हुई होगी,
चलो दूर रहने वालें को कहीं छोर आये,
ये शब्द है दूर होकर भी प्यार जताने आ जाते,
बहुत दूर से ये रिश्ता .. अब भी वैसा ही है !

Sujit

अनवरत यूँ ही रोज चलते है !

सुबह किस सफर पर फिर चले,
फिर किसी शाम को आज ले लौटे;
ना कहीं पँहुचते है ना बढते है;
बस अनवरत यूँ ही रोज चलते है !

 

कुछ हसरतों को रोज कुचलते है,
कुछ उम्मीदों से यूँ ही रोज जगते है,
है रात ये कितनी बड़ी सी लगती है,
यादों के फेहरिस्त से जो रोज मिलते है !

 

मेरा सफर ही मालूम नहीं मुझकों,
दो कदम भटक कर फिर उसी राह पर चलते है,
ये पड़ाव जिसे मंजिल हम समझते है,
वो राहगीर जिसे हमसफर हम समझते है,
टूट जाता है वहम हर कदम मेरा,
जब मेरे राहों में छोर वो जब निकलते है,
जब रूबरू होते है खुद से,
ये कदम खुद ही खुद मेरे उठते है,
बस अनवरत यूँ ही रोज चलते है !

— #SK —

sk-poetry

हाथों से फिसल से गये …

किसी रोज की दूसरी बारिश थी,
बुँदे इस तरह कांचों से फिसल गये,
जैसे धुल गये अवसाद कितने पुराने,
लिपटते रहे बूंदें कांचों से कितने भी,
रिश्ते कच्चे थे हाथों से फिसल से गये !

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हर मुसाफिर गमगीन था अपने यादों में,
इस शहर की बारिश में सब बिसर से गये,
आसमाँ सिमट से गये, बादल भी बिखर से गये,
ना पूछा हवाओं से रुख किस ओर है जाना,
वो बहते रहे कुछ कहते रहे, ना साथ चले वो,
ना मंजिल सफर जाना, जिधर रुख किये चलते ही रह गये !

हम दूर कितने जा के जिंदगी जानेगें अब,
कितने ख्वाब टूटे, कितनी यादें उजर से गये,
सब रिश्ते कच्चे थे हाथों से फिसल से गये !

#SK

 

Insane Life …

क्या आसां है उन चिड़ियों को कह देना,
उस बरामदे तुम ना चहचहाना अब;
अब अजनबी सा वो मकान हो गया है;
सुबह को भी बनाना मुश्किल ही है,
चेहरों पर उभरती हुई रेखाओं की तरह !!

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चेहरें पर हँसी का क्या खामोश ही है,
उसने तो देखी ही है उलझने कई;
इन मायूसी ने भी भी कई शाम बिताए है,
पाषाण सा हृदय अब नजरअंदाज करता कई बातें,
जिंदादिल हो मिलता है वो शहर के लोगों से !

सजा और गुनाह का मतलब पाट चुका अब,
छोड़ जाता है कई ख्वाबों को रातों के हवाले,
ना बातें करता ना पूछता किस्सा उसका कोई,
कुछ तो खोया ही होगा इन अँधेरों में उसका भी,
जिंदगी पर अक्सर बातें किया करता है वो !

#SK

बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !!

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क्या खुद के विश्वास पर भी ..
अविश्वास किया जा सकता !
उहापोह है इस प्रश्न पर ..
अंतर्द्वंद भी बोझ भी !

बहुत बड़ा रंगमंच है;
इस ओर से उस ओर,
कुछ महसूस नहीं होता,
ना जान परता किरदारों
से किरदारों का कोई रिश्ता !

डूब जाता हूँ मुखौटे से लगे चेहरे में,
भूल जाता उसके पीछे के किसी इन्सान को,
नई कहानियों में चला जाता कहीं दूर,
सहसा बदल जाता सब कुछ,
मिलता एक नया मुखौटा ;
कथानक का नया धरातल,
उसमे फिर डूबने को दुबारा,
कोई नहीं जान पाता उस पीछे छुपे चेहरे को,
अपारदर्शी निरंतर बदलते रहते मुखौटे के पीछे,
विवश से चेहरे असंतुष्ट से,
निभाये जा रहे हर किरदार !

शिकायत है उसे कथाकार से,
नहीं बदल सकता इतना चेहरा,
कुछ बनावटी किरदारों से उसे प्यार है,
ख़ुशी मिलती उसे वैसा जी के !

कब पटाक्षेप कभी करतल..
बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !!

#SK in Night & Pen ………