Poetry

किसी आँगन की खामोशी …….

किसी आँगन की खामोशी को देखा है, ना क़दमों की आहट है कोई, ना पायलों की रुनझुन ही बजते, ना किलकारी ही गूँजती अब, ना कोई रूठता ना रोता है !! ऐसे सुने से परे है हर कोने, जैसे घने जंगलों में शब्द खो जाते, ना भूलती है माँ वो … हर शाम दहलीज पर […]

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कुछ कागजों के बीच – The Memory In My Old Wallet

पुराने बटुए में कुछ कागजों के बीच, कुछ महफूज़ रखा है हमने यादों को ! अनेकों आधे अधूरे लम्हों को, थोरा थोरा जिक्र करके रखा है हमने ! अनेकों छोटे छोटे कागजों के टुकड़े है, मैं तलाश रहा वो उस दिन का खोया सा किस्सा, भीड़ ज्यादा थी हर तरफ लोगों की रास्तों पर, किसी […]

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दूर से ये रिश्ता …

बहुत दूर से ये रिश्ता, धुँधला धुँधला सा लगता, कभी कभी आकर वो इसे, इक नाम दे जातें है ! हाँ में रुकसत भी नहीं करता, ना ही थामता हूँ आगे बढकर, इक दफा उब कर दूरियों से, हमने बंधनों की सिफारिश की थी ! क्या समझाया था उसने, या समझ पाया था मैं जितना, […]

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अनवरत यूँ ही रोज चलते है !

सुबह किस सफर पर फिर चले, फिर किसी शाम को आज ले लौटे; ना कहीं पँहुचते है ना बढते है; बस अनवरत यूँ ही रोज चलते है !   कुछ हसरतों को रोज कुचलते है, कुछ उम्मीदों से यूँ ही रोज जगते है, है रात ये कितनी बड़ी सी लगती है, यादों के फेहरिस्त से […]

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हाथों से फिसल से गये …

किसी रोज की दूसरी बारिश थी, बुँदे इस तरह कांचों से फिसल गये, जैसे धुल गये अवसाद कितने पुराने, लिपटते रहे बूंदें कांचों से कितने भी, रिश्ते कच्चे थे हाथों से फिसल से गये ! हर मुसाफिर गमगीन था अपने यादों में, इस शहर की बारिश में सब बिसर से गये, आसमाँ सिमट से गये, […]